नई दिल्ली |मध्य पूर्व में ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। पहली बार अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक F-22 रैप्टर स्टेल्थ लड़ाकू विमानों को इज़राइल के एयरबेस पर तैनात किया है। इसे क्षेत्र में संभावित संघर्ष की तैयारी और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार करीब 12 अमेरिकी F-22 स्टेल्थ फाइटर जेट इज़राइल के दक्षिणी एयरबेस पर उतरे हैं। इन विमानों की तैनाती क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में तुरंत जवाबी कार्रवाई के उद्देश्य से की गई है। यह कदम मध्य पूर्व में अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी का हिस्सा माना जा रहा है, जहां पहले से ही कई हवाई और नौसैनिक संसाधन तैनात किए जा चुके हैं।
F-22 रैप्टर को दुनिया के सबसे उन्नत एयर सुपीरियरिटी स्टेल्थ फाइटर जेट्स में गिना जाता है। यह विमान रडार से बचते हुए उड़ान भरने, दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदने और सटीक हमले करने में सक्षम है।
दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल गतिविधियों को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार विकसित न करने की चेतावनी दी है और साफ किया है कि यदि कूटनीतिक प्रयास असफल होते हैं तो सैन्य विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं।
इज़राइल के रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव युद्ध में बदलता है तो इन उन्नत लड़ाकू विमानों की तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम साबित हो सकती है। वहीं, अमेरिका और इज़राइल के बीच मजबूत सैन्य सहयोग इस कदम से और मजबूत होने की संभावना है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह तैनाती केवल सुरक्षा तैयारी नहीं, बल्कि ईरान के लिए एक स्पष्ट संदेश भी है कि अमेरिका और उसके सहयोगी किसी भी संभावित स्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।