राहुल चावला, धर्मशाला -:कांगड़ा जिले में इस वित्त वर्ष के दौरान घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, अब तक जिले में कुल 616 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से 160 मामले ऐसे हैं जिनमें समझौता नहीं हो पाया और जिन्हें कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। वहीं, 50 मामलों में काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है, जबकि शेष मामलों में पति-पत्नी के बीच समझौता कर लिया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम
अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि घरेलू हिंसा के मामलों में नशे का प्रभाव सबसे प्रमुख कारण के रूप में सामने आया है। इसके अलावा युवा जोड़ों में एक-दूसरे से बढ़ती अपेक्षाओं ने भी कई घरों में तनाव उत्पन्न किया है।“जिला के सभी विकास खंडों से घरेलू हिंसा के मामले आ रहे हैं। हमारी टीम प्रोटेक्शन ऑफिसर के माध्यम से इन मामलों को सुलझाने में मदद करती है। हालांकि कई मामलों में पारिवारिक समझौते हो जाते हैं, लेकिन नशे का कारण कई बार गंभीर समस्याओं को जन्म देता है,”
महिला एवं बाल विकास विभाग का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के संरक्षण और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। 2005 के घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत विभाग को महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। विभाग के सुपरवाइजर और प्रोटेक्शन ऑफिसर मिलकर ऐसे मामलों का समाधान करने के प्रयास में लगे रहते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है। सामाजिक जागरूकता, नशामुक्ति कार्यक्रम और पारिवारिक काउंसलिंग जैसी पहलें भी जरूरी हैं। यह जरूरी है कि युवा और बुजुर्ग दोनों ही घरेलू संघर्षों को हल करने के लिए सही दिशा में कदम उठाएं और हिंसा को रोकें।कांगड़ा जिले में महिलाओं की सुरक्षा और घरेलू हिंसा के मामलों पर निगरानी जारी है, और संबंधित विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करने और प्रभावित परिवारों की मदद करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।