तिरुप्परनकुंद्रम | मद्रास हाई कोर्ट ने तिरुप्परनकुंद्रम में दीपम जलाने को लेकर चल रहे विवाद पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उसके पूर्व निर्देशों को जमीन पर लागू नहीं किया गया, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के समान है।
जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने सुनवाई के दौरान कहा कि पांच लोगों के समूह को ‘दीपथून’ नामक पहाड़ी खंभे तक जाकर 15 मिनट की प्रतीकात्मक प्रार्थना की अनुमति दी जा सकती है। यह व्यवस्था न्यायालय के पहले आदेश के सम्मान में सुझाई गई थी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई बाध्यकारी नया आदेश नहीं था, बल्कि पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन का एक व्यावहारिक प्रस्ताव था।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस ने न्यायालय के निर्देशों को लागू करने के बजाय जिला कलेक्टर के आदेश का सहारा लिया। अतिरिक्त हलफनामे में कलेक्टर की ओर से कहा गया था कि बीएनएसएस की धारा 163 के तहत जारी प्रतिबंध कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए था और इसका उद्देश्य मंदिर प्रशासन को एक दिसंबर के आदेश के अनुसार दीपम जलाने से रोकना नहीं था। बावजूद इसके, अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जा सका।
मामले की पृष्ठभूमि में मंदिर प्रशासन का यह तर्क रहा है कि पिछले एक सदी से अधिक समय से कार्तिगई दीपम केवल पहाड़ी के ऊपर उच्ची पिल्लयार मंदिर के पास ही जलाया जाता रहा है और इस परंपरा में बदलाव से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं। फिलहाल अदालत के निर्देशों के अनुपालन और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।