समर एक्सप्रेस/शिमला, संजू-:शिमला में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुखराम सिंह सुक्खू गनीमत माने कि भाजपा ने राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं दिया। ठाकुर ने कहा कि अगर उम्मीदवार दिए जाते तो मुख्यमंत्री चैन से सो भी नहीं पाते। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के बहाने मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकार एक मित्रमंडल द्वारा संचालित हो रही है और इसी समूह के फैसलों से पूरे प्रशासन और राजनीति की दिशा तय होती है।
ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता डर और अस्थिरता के माहौल में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्यसभा सीट के लिए कई नेता दिल्ली और शिमला तक दौड़ते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री ने केवल अपने मित्रों के नाम पर ही विचार किया और अन्य नेताओं को झूठे आश्वासन दिए। ठाकुर ने यह भी कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने अपनी पीड़ा जाहिर की और कहा कि सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन उन्होंने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की राजनीतिक यात्रा में पंडित सुखराम और आनंद शर्मा जैसे नेताओं का बड़ा योगदान रहा, लेकिन सत्ता में आने के बाद सुक्खू ने उन्हीं नेताओं को किनारे कर दिया। ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार केवल मित्रमंडल चलाती है और वही तय करता है कि प्रदेश को कैसे चलाना है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति को राज्यसभा का टिकट दिया गया उसे सामान्य कार्यकर्ता बताया गया, जबकि उसके पास करीब 23 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति और कई बड़े सरकारी ठेके थे।
ठाकुर ने मुख्यमंत्री के दौरे और गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली से शिमला आने का टूर प्रोग्राम जारी होता है, लेकिन मुख्यमंत्री अक्सर अज्ञातवास में चले जाते हैं, जो संवैधानिक दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पूर्व मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह भी सवाल बने हुए हैं.
सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में अवैध पेड़ कटान को लेकर ठाकुर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि केवल 25 पेड़ों की कटाई की अनुमति थी, लेकिन 300 से अधिक पेड़ काट दिए गए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस बयान को विचित्र बताया जिसमें कहा गया कि “जहां पैदल जाने का रास्ता नहीं है, वहां पेड़ कैसे काटे जा सकते हैं।” ठाकुर ने कहा कि क्या मुख्यमंत्री में इतनी हिम्मत है कि वह अपने मंत्री के करीबी व्यक्ति रणजीत नेगी के खिलाफ कार्रवाई करें। उन्होंने मंडी में भी इसी तरह के अवैध पेड़ कटान का मामला याद दिलाया, जो वर्तमान में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए ठाकुर ने कहा कि ऊना में एक युवक को सरेआम गोली मारी गई, सिर पर तलवारें चलीं, नालागढ़ में भी गोलियां चलीं और बिलासपुर में पांच साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की घटना हुई। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले से ही “हिमाचल ऑन सेल” की बात कहती रही है और अब वही माहौल दिखाई दे रहा है। उन्होंने पर्यटन निगम के 23 होटलों की बिक्री पर भी सवाल उठाया और कहा कि अब इसमें 8 और होटल जोड़ दिए गए हैं।
जयराम ठाकुर ने अंत में कहा कि प्रदेश के हितों की बजाय सरकार केवल सत्ता में बने रहने में लगी है और जनता के मुद्दे पीछे छूट गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि प्रदेश के विकास और जनहित से सरकार का कोई सरोकार नहीं है और केवल अपने मित्रमंडल और व्यक्तिगत हितों के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं।