Summer Express, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया में उत्पन्न गंभीर हालात पर चर्चा की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव, आम नागरिकों की मौत और असैन्य ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का समाधान संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति से क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थक है और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की आवश्यकता है।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही सामान और ऊर्जा आपूर्ति के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करना भी भारत के लिए बेहद अहम है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश की मौजूदा स्थिति और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी। दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर आगे भी संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई।
गौरतलब है कि हाल ही में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके रास्ते भारत अपने ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा प्राप्त करता है। दो दिन पहले भारत की ओर आ रहे एक तेल टैंकर पर भी ईरानी सेना ने गोलीबारी की थी, जब वह इसी जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहा था।
पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इन हमलों का असर दुबई और दोहा जैसे प्रमुख वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्रों तक भी देखा गया।
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी पिछले दस दिनों में पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं। उन्होंने ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इज़राइल और कतर के नेताओं से भी फोन पर बात कर क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और इन देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण को लेकर भी चिंता जताई। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिनमें लगभग 10 हजार भारतीय ईरान में और 40 हजार से अधिक इज़राइल में निवास करते हैं।