Summer express , कपूरथला | पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्ष और विभिन्न वर्गों की ओर से आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश में अपराध और नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है, जिससे आम लोगों में असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
आरोप है कि सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने प्रदेश को नशा और अपराध मुक्त बनाने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अपराधी गतिविधियों में कमी आने के बजाय कई क्षेत्रों में घटनाएं बढ़ी हैं।
सरकार की ओर से अपराध नियंत्रण के लिए ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसी मुहिम भी चलाई गई थी, जिसका उद्देश्य गैंगस्टरों और संगठित अपराध में शामिल लोगों पर शिकंजा कसना था। हालांकि आलोचकों का कहना है कि इस अभियान का असर सीमित रहा और बड़े अपराधियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
इसके अलावा, कुछ मामलों में सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद भी गहरा गया है। विपक्ष का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कारण कार्रवाई में ढील बरती जा रही है, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति का सीधा असर राज्य के आर्थिक माहौल पर पड़ता है। बढ़ते अपराध के चलते कारोबारी वर्ग में चिंता बढ़ी है और कुछ निवेशक नए प्रोजेक्ट्स को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
फिलहाल, सरकार की ओर से इन आरोपों पर लगातार कार्रवाई और सुधार के दावे किए जा रहे हैं। वहीं, आम जनता और विभिन्न संगठनों की नजर इस बात पर टिकी है कि कानून-व्यवस्था को लेकर आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।