शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में उस समय माहौल गरमा गया, जब राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अपना वक्तव्य रखा। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे सदन का वातावरण काफी तनावपूर्ण हो गया।
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए विपक्ष पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब भाजपा सत्ता में थी, तब भी राज्यपाल पूरा अभिभाषण पढ़े बिना ही कुछ मिनटों में सदन से चले गए थे। उस दौरान जब कांग्रेस विधायक अपनी बात रखने राज्यपाल के पास पहुंचे, तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए गए। अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के छह विधायकों पर एफआईआर दर्ज की गई और यहां तक कि देशद्रोह जैसे गंभीर मामले भी लगाए गए, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।उन्होंने इसे विधायकों के विशेषाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सदन के भीतर दिए गए वक्तव्यों को लेकर बाहर आपराधिक या मानहानि के मामले दर्ज नहीं किए जा सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विधायक को सदन से बाहर निकालने का अधिकार केवल विधानसभा अध्यक्ष के पास होता है, लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करना अनुचित है। इस पूरे प्रकरण पर उन्होंने स्पीकर से “स्पीकिंग ऑर्डर” जारी करने की मांग भी की, ताकि विधायकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
राज्य की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाते हुए उपमुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को अहम विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह देश का पहला मामला है, जहां प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने विपक्ष से इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट स्थिति रखने की मांग की और कहा कि प्रदेश के वित्तीय हितों को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं में हिमाचल को उसका वाजिब हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके अलावा राज्य को बुनियादी ढांचे के विकास में भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में चुनाव के दौरान तीन ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की घोषणा की गई, जबकि हिमाचल को अभी तक ऐसी सुविधाओं में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला है।नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर भी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले वे सरकार को गिरने की भविष्यवाणी कर रहे थे और अब “शाप” देने की बात कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे प्रदेश के वित्तीय और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट नीति सामने रखें।