Summer Express,फरीदाबाद | फरीदाबाद में तेजी से फैल रही अवैध कॉलोनियों के मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले जिम्मेदार लोगों की पहचान कर जांच करने के निर्देश प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। इस आदेश के बाद प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
जिले में कृषि योग्य भूमि पर अवैध कॉलोनियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। नगर निगम सीमा से लेकर यमुना नदी क्षेत्र तक एक हजार से अधिक अवैध कॉलोनियां बसाई जा चुकी हैं। कई स्थानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई होने के बावजूद दोबारा निर्माण शुरू हो जाता है, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
इन कॉलोनियों को रोकने की जिम्मेदारी जिला नगर योजनाकार (एन्फोर्समेंट) विभाग पर है, लेकिन इसके बावजूद अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका। अब हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो इस मामले में गहराई से जांच करेगा।
सूत्रों के अनुसार, ब्यूरो जल्द ही पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड तलब करेगा, जिसमें यह देखा जाएगा कि कितनी अवैध कॉलोनियां विकसित हुईं, किन अधिकारियों की उस दौरान तैनाती रही और क्या कार्रवाई की गई। इस जांच के बाद संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध कॉलोनियों का यह विस्तार मास्टर प्लान 2031 के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र के कई गांवों,जैसे खेड़ी कलां, नचौली, ताजुपुर, जाजरू और तिगांव,में बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही है, जबकि इन्हीं क्षेत्रों में भविष्य में शहरी विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
यदि समय रहते इन अवैध निर्माणों पर रोक नहीं लगी, तो मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित सड़कें, सेक्टर और अन्य ढांचागत परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल प्रशासन का दावा है कि हर महीने 10 से 12 स्थानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।