Summer Express,पालमपुर । पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने संबंधी फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस निर्णय को सभ्य समाज के मूल्यों के खिलाफ बताते हुए इसे ‘भयंकर पागलपन’ करार दिया और कहा कि ऐसे प्रावधान समाज के ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं।
शांता कुमार ने देश की सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द सख्त कानून बनाया जाए और लिव-इन रिलेशनशिप को दंडनीय अपराध घोषित किया जाए। उनका कहना है कि इस प्रकार के संबंध सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं और पारिवारिक संरचना पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में लिव-इन रिलेशनशिप के मामले में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न किए जाने की बात कही थी। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए शांता कुमार ने कहा कि ऐसे संबंध समाज की बुनियाद को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई शादीशुदा व्यक्ति, जिसके बच्चे भी हों, अपनी पत्नी को छोड़कर किसी अन्य के साथ रहने लगता है, तो यह न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इस प्रकार की स्थितियों को सामाजिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप के कारण परिवारों पर मानसिक और सामाजिक प्रभाव पड़ता है, जिससे बच्चों के जीवन पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चों के मनोविज्ञान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कई परिवार टूटने की कगार पर पहुंच जाते हैं।
शांता कुमार ने जोर देकर कहा कि इस तरह की प्रथाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती हैं। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी रूप से प्रतिबंधित करने पर विचार करें।