Summer express,बलिन्द्र कुमार, कैथल। जिले में गेहूं खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए इस बार सरकार द्वारा कई नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनमें बायोमीट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और जीओ-फेंसिंग प्रमुख हैं। किसानों को इन नियमों की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जिला उपायुक्त अपराजिता ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्रदेश स्तर पर आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद गेहूं खरीद से जुड़े अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बायोमीट्रिक प्रक्रिया मंडी के गेट पर नहीं, बल्कि गेहूं की ढेरी की खरीद के समय की जाएगी। किसान अपने परिवार के तीन सदस्यों को इसके लिए अधिकृत कर सकता है, ताकि उनकी अनुपस्थिति में भी खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
उन्होंने बताया कि मंडी में प्रवेश के समय वाहन का फोटो सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाएगा और हर वाहन की रीयल टाइम निगरानी की जाएगी। हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसेक) के डाटा के आधार पर किसानों की फसल का गिरदावरी से मिलान भी किया जाएगा। इसके अलावा मंडी क्षेत्रों में जीओ-फेंसिंग लागू की गई है, ताकि निर्धारित क्षेत्र के बाहर गेटपास न कट सकें और खरीद प्रक्रिया केवल निर्धारित परिसर में ही हो।
डीसी ने कहा कि गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाए और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि गेहूं में नमी अधिक है, तो किसानों को संतुष्ट करते हुए नियमानुसार खरीद की जाए। पूरी प्रक्रिया—प्रवेश, गेटपास, खरीद, उठान और गोदाम तक पहुंच—में पारदर्शिता और सख्ती बरती जाएगी। परिवहन वाहनों में जीपीएस सिस्टम अनिवार्य रूप से चालू होना चाहिए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मंडियों में बारदाना, पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, कैंटीन में स्वच्छ भोजन और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही बारिश के मौसम को देखते हुए पॉलिथीन शीट, डिजिटल कांटे और पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था भी करने को कहा गया है।
पुलिस विभाग को मंडियों में जाम की स्थिति न बनने देने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं राज्य की सीमाओं पर नाके लगाकर बाहरी गेहूं की आवक पर निगरानी रखने को भी कहा गया है। डीसी ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसानों को भुगतान समय पर मिले और सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।