Summer Express,करनाल | करनाल में गेहूं सीजन शुरू होने से पहले ही ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर फर्जीवाड़े के मामले सामने आने लगे हैं। कई ऐसे स्थानों पर भी गेहूं की फसल दर्शाई गई है, जहां वास्तव में आबादी क्षेत्र विकसित है, वहीं यमुना नदी की धारा और रेत पर भी फसल का दावा किया गया है। इससे पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रदेश में पहली अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हो रही है, ऐसे में सरकार ने इस बार सख्ती बढ़ा दी है। ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर बड़े स्तर पर फर्जी पंजीकरण की आशंका को देखते हुए सत्यापन प्रक्रिया को तीन स्तरों पर लागू किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 12,09,492 किसानों ने 65,74,846 एकड़ क्षेत्र में गेहूं की बिजाई का दावा पोर्टल पर दर्ज कराया है।
जांच प्रक्रिया के दौरान अब तक 8.64 लाख एकड़ का डेटा मिसमैच पाया गया है। आशंका जताई जा रही है कि कुछ मामलों में फर्जी तरीके से गेहूं की आवक दिखाने या अन्य राज्यों से सस्ते दामों पर गेहूं लाकर हरियाणा की मंडियों में एमएसपी पर बेचने के लिए गलत पंजीकरण कराया गया है। सरकार द्वारा सैटेलाइट इमेज, पटवारी स्तर की जांच और कृषि विभाग की रिपोर्ट के माध्यम से फसल की सत्यता का तीन स्तरों पर सत्यापन किया जा रहा है, जिसके बाद ही पंजीकरण को मान्य किया जा रहा है।
जिलावार आंकड़ों में भी कई जगह बड़ा अंतर सामने आया है, जिसमें भिवानी, हिसार, यमुनानगर, चरखी दादरी जैसे जिलों में मिसमैच एरिया अधिक पाया गया है, जबकि फरीदाबाद में यह सबसे कम है। कुल 65.74 लाख एकड़ में से अभी तक 8.64 लाख एकड़ क्षेत्र का डेटा मेल नहीं खा रहा है, जिससे जांच की जरूरत और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण ही मंडियों में घोटालों की मुख्य वजह बनता है। पिछले वर्षों में भी इसी तरह के मामलों में धान और अन्य फसलों की फर्जी आवक दिखाकर एमएसपी का लाभ उठाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसी वजह से प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क है और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए सख्त निगरानी रखी जा रही है।