Summer Express, झज्जर। महाकुंभ के दौरान अपनी आध्यात्मिक सोच और अलग पहचान के चलते चर्चा में आए आईआईटीयन बाबा अभय सिंह करीब दो साल बाद अपने पैतृक शहर झज्जर पहुंचे। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी प्रीतिका भी मौजूद रहीं, जो मूल रूप से कर्नाटक के मैंगलोर की रहने वाली हैं और पेशे से इंजीनियर हैं। झज्जर आगमन पर यह दौरा जहां पारिवारिक मुलाकात का अवसर बना, वहीं उन्होंने अपनी भविष्य की योजनाओं और शिक्षा व समाज को लेकर अपने दृष्टिकोण को भी साझा किया।
अभय सिंह ने बताया कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली केवल रोजगार तक सीमित रह गई है, जबकि जीवन के समग्र विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। इसी सोच के तहत वे अपनी पत्नी प्रीतिका के साथ मिलकर एक नया शिक्षा मॉडल विकसित कर रहे हैं, जिसे ‘श्रीयूनिवर्सिटी’ नाम दिया गया है। यह मॉडल प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा प्रणाली का समन्वय होगा, जिसका उद्देश्य युवाओं को न केवल अकादमिक ज्ञान देना बल्कि जीवन प्रबंधन और आध्यात्मिक समझ भी प्रदान करना है।
इस पहल के तहत दोनों ऑनलाइन सेशन के माध्यम से युवाओं और जिज्ञासुओं को मार्गदर्शन दे रहे हैं। उनका लक्ष्य एक ऐसा रिसर्च और लर्निंग सेंटर स्थापित करना है, जहां विद्यार्थी आधुनिक जीवन को आध्यात्मिक संतुलन के साथ जीना सीख सकें।
इसके साथ ही अभय सिंह ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में महादेव के समीप एक आश्रम स्थापित करने की योजना भी साझा की। उनका कहना है कि गंजण महादेव के आसपास का क्षेत्र उन्हें विशेष ऊर्जा प्रदान करता है, और वे उसी स्थान को अपने आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहते हैं।
झज्जर प्रवास के दौरान उन्होंने अपने पैतृक गांव सासरौली स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उनकी मां, मौसी और अन्य परिजन भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने पिता और वरिष्ठ अधिवक्ता कर्ण सिंह ग्रेवाल के चैंबर में भी मुलाकात की तथा तहसील और बैंक से जुड़े आवश्यक कार्य पूरे किए।
अभय सिंह ने बताया कि कुम्भ के बाद वे साधना और यात्रा में व्यस्त रहे और अब महादेव के आशीर्वाद से अपने जीवन के नए चरण की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश में शिवरात्रि के अवसर पर अपनी पत्नी प्रीतिका के साथ विधिवत और कानूनी रूप से विवाह किया है।