धर्मशाला, राहुल -:जिला कांगड़ा में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाएं अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से अपने उत्पादों को प्रमोट करना सीख रही हैं। डिजिटल और फाइनेंशियल लिटरेसी में पारंगत बनाने के उद्देश्य से डीआरडीए सभागार में तीन दिवसीय विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन IIT दिल्ली द्वारा किया गया है। आयोजक टीम के प्रतिनिधि पुरारी शर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं एआई की अडवांस तकनीक तो नहीं सीखेंगी, लेकिन बेसिक नॉलेज जरूर प्राप्त करेंगी। उन्हें बताया जाएगा कि कैसे वे एआई टूल्स और एलएलएम (Large Language Models) का इस्तेमाल कर अपने उत्पाद का प्रचार कर सकती हैं। विशेष रूप से यह भी सिखाया जाएगा कि यदि लिखना नहीं आता, तो बोलकर भी कंटेंट क्रिएट किया जा सकता है।
प्रोग्राम में 50 महिलाओं के लिए स्लॉट तय किए गए थे, लेकिन इसमें करीब 60 महिलाएं शामिल हुईं, जो इस पहल में उत्साह और सक्रियता को दर्शाता है। प्रशिक्षण को प्रो. सीमा शर्मा और प्रो. गौरव द्विवेदी लीड कर रहे हैं। देश के छह राज्यों में 11 ट्रेनिंग प्रोग्राम सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि धर्मशाला में यह 12वां प्रोग्राम है।
पुरारी शर्मा ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के आकलन में यह पाया गया कि डिजिटल लिटरेसी की कमी के कारण एसएचजी की महिलाएं अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में पिछड़ रही थीं। इस ट्रेनिंग के माध्यम से उन्हें डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल कर कारोबार बढ़ाने, आत्मविश्वास और व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित करने की क्षमता दी जा रही है।
ट्रेनिंग में भाग लेने वाली महिलाएं करीब चार महीनों तक आईआईटी दिल्ली के रिसर्चर्स और वैज्ञानिकों से जुड़ी रहेंगी और आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त करती रहेंगी। इसके साथ ही उनके लिए एक विशेष गाइड बुक भी तैयार की गई है, जिससे उन्हें अपने व्यवसाय को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पुरारी शर्मा ने कहा कि इस पहल से न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि वे अपने उत्पादों को प्रभावी ढंग से प्रचारित कर आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल और वित्तीय सशक्तिकरण का एक बड़ा कदम साबित होगी।