शिमला ,संजू-;:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा पूर्व विधायकों की पेंशन बहाल करने के आदेश के बाद राज्य सरकार ने संतुलित प्रतिक्रिया दी है। संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार ने अभी तक फैसले का पूरा अध्ययन नहीं किया है, लेकिन जल्द ही इसके सभी कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने केवल दो पूर्व विधायकों के मामलों में पेंशन जारी करने के निर्देश दिए हैं और किसी मौजूदा कानून या विधेयक पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की है।
मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार पहले एक पेंशन संशोधन विधेयक लेकर आई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। इसके स्थान पर बजट सत्र 2026 में एक नया विधेयक पारित किया गया। इस नए कानून में केवल 14वीं विधानसभा के उन विधायकों की पेंशन रोकने का प्रावधान किया गया है, जिन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह प्रावधान भविष्य के मामलों पर लागू होगा और इसका पूर्व विधायकों की पेंशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि जिन मामलों में पूर्व विधायक अदालत पहुंचे थे, वहां कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर पेंशन जारी करने का निर्णय दिया है। सरकार अब यह तय करेगी कि इस फैसले के खिलाफ अपील करनी है या नहीं।उन्होंने यह भी कहा कि नया पेंशन प्रावधान किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं लाया गया, बल्कि इसका उद्देश्य दल-बदल और क्रॉस वोटिंग जैसी प्रवृत्तियों पर रोक लगाना है। राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और बजट सत्र में अनुपस्थिति के कारण कुछ विधायकों की अयोग्यता का मुद्दा भी इसी संदर्भ में सामने आया। मंत्री के अनुसार, हिमाचल की राजनीति में इस तरह की घटनाएं पहले नहीं देखी गई थीं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।