Summer Express, कैलिफोर्निया। नासा (NASA) के आर्टेमिस-2 मिशन ने 10 दिनों की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा पूरी करने के बाद प्रशांत महासागर में सफल ‘स्प्लैशडाउन’ किया। ओरियन कैप्सूल कैलिफोर्निया तट के पास सुरक्षित रूप से समुद्र में उतरा, जिसके साथ मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
यह मिशन 1 अप्रैल को फ्लोरिडा से दुनिया के सबसे शक्तिशाली स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था। इस दौरान चार अंतरिक्ष यात्रियों ने कुल 11.16 लाख किलोमीटर से अधिक की यात्रा पूरी की और पृथ्वी से लगभग 4,06,771 किलोमीटर दूर तक पहुंचे, जो अपोलो-13 मिशन के रिकॉर्ड से भी आगे है।
मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के उस हिस्से का भी अवलोकन किया जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। यह अनुभव भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक दल में रीड वाइजमैन कमांडर के रूप में शामिल थे, जबकि विक्टर ग्लोवर पायलट बने। उनके साथ क्रिस्टीना कोच और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसन मिशन विशेषज्ञ के रूप में शामिल रहे। यह पहला अवसर था जब इतनी विविधता के साथ अंतरराष्ट्रीय दल चंद्र अभियान में शामिल हुआ।
पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान ओरियन कैप्सूल की गति लगभग 39,000 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जिससे बाहरी तापमान 2,760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इस दौरान प्लाज्मा परत बनने के कारण करीब छह मिनट तक संचार संपर्क बाधित रहा, जिसे ‘ब्लैकआउट फेज’ कहा जाता है। हालांकि उन्नत हीट शील्ड और पैराशूट प्रणाली ने कैप्सूल को सुरक्षित समुद्र में उतार दिया।
नासा अधिकारियों के अनुसार, आर्टेमिस-2 की सफलता अब अगले चरण आर्टेमिस-3 के लिए मार्ग प्रशस्त करती है, जिसके तहत वर्ष 2028 तक मानवों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है। एजेंसी का लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी आधार स्थापित करना और भविष्य में मंगल मिशन के लिए इसे एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में विकसित करना है।