Summer express/मंडी, धर्मवीर-:भारतीय पोद्यौगिकी संस्थान यानी आईआईटी मंडी द्वारा निर्मित प्रोटोटाइप रोबोटिक हैंड चार सालों बाद एक बार फिर मार्स रोवर प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पूरी तरह से तैयार है। संस्थान ने पिछली गलतियों से सबक लेते हुए इसे और आधुनिक व प्रभावशाली बनाने पर बल दिया है। यदि इस बार की प्रतियोगिता में यह प्रोटोटाइप पास होता है न केवल संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए देश की भी बड़ी उड़ान मानी जाएगी। क्योंकि मंगल ग्रह पर अमेरिका और चीन के अलावा अभी तक कोई भी देश अपना मार्स रोवर नहीं भेज पाया है।
दरअसल, आईआईटी मंडी ने दूसरी बार मार्स रोवर का प्रोटोटाइप बनाने में सफलता हासिल की है। अब इस प्रोटोटाइप को कॉम्पिटिशन के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। यह कॉम्पिटिशन मार्स रोवर सोसायटी द्वारा आयोजित किया जाता है। इसकी डेट्स आना अभी बाकी है। इससे पहले भी आईआईटी ने मार्स रोबर बनाया था लेकिन वो अपने ही देश से क्वालीफाई होने से मात्र कुछ अंकों से चूक गया था। मार्स रोवर प्रोजेक्ट के टीम लीडर निवेशा ने बताया कि मार्स रोवर सोसायटी द्वारा विश्व भर के प्रोटोटाइप को लेकर कॉम्पिटिशन करवाए जाते हैं। वहां मार्स यानी मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों पर इन रोवर को संचालित करके परीक्षण किया जाता है। उन्होंने बताया कि जो कमियां पिछली बार रह गई थी उनमें बहुत ज्यादा सुधार किया गया है।
बता दें कि मार्स यानी मंगल ग्रह पर जीवन सहित अन्य बातों की संभावनाओं को तलाशने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए भारत ने मंगलयान तो भेजा है लेकिन अभी तक देश का कोई भी मार्स रोवर वहां पर मौजूद नहीं है। वहां सिर्फ अमेरिका और चाइना के मार्स रोवर ही मौजूद हैं। भारत के इस दिशा में प्रयास जारी हैं। ऐसे में भारत के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में मार्स रोवर के प्रोटोटाइप बनाने के प्रयास भी जारी हैं। आईआईटी मंडी के मार्स रोवर प्रोजेक्ट के टीम लीडर निवेशा ने बताया कि इस प्रोटोटाइप से बाकी लोगों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। हमारा यही प्रयास है कि भारत का रोवर भी मंगल ग्रह पर उतरे और यह देश के लिए गर्व की बात होगी।
बता दें कि मार्स रोवर प्रतियोगिता एक अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग और रोबोटिक्स प्रतियोगिता है, जिसमें छात्र मंगल ग्रह की परिस्थितियों में काम करने के लिए रोवर निर्मित और संचालित करते हैं। इसमें रोवर द्वारा वैज्ञानिक प्रयोग करने, बाधाओं को पार करने और उपकरणों की मरम्मत जैसे कार्यों का परीक्षण किया जाता है।