प्राकृतिक खेती से कमाल: 18 मरले में गन्ने से 70 किलो शक्कर तैयार

Chandrika
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Summer Express - प्राकृतिक खेती से कमाल: 18 मरले में गन्ने से 70 किलो शक्कर तैयार

हमीरपुर,अरविंद-:हमीरपुर जिले के कम वर्षा और पथरीली भूमि वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव है—यह बात अब किसी कल्पना से अधिक एक सच्चाई बन चुकी है। विकास खंड बमसन के गांव हरनेड़ के प्रगतिशील किसान ललित कालिया ने प्राकृतिक खेती अपनाकर इस धारणा को बदल दिया है। उन्होंने केवल 18 मरले भूमि पर गन्ने की फसल उगाकर पहले ही सीजन में लगभग 70 किलोग्राम शक्कर तैयार की।

ललित कालिया, जो पूरी तरह प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं, ने हाल ही में आतमा परियोजना के अधिकारियों के साथ उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ से मुलाकात कर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कुछ वर्षों पहले शुरू की गई प्राकृतिक खेती अब उनके गांव में एक आंदोलन का रूप ले चुकी है। हरनेड़ गांव के करीब 52 परिवार अब गेहूं, मक्की, मोटा अनाज और दलहनी फसलें प्राकृतिक विधि से उगा रहे हैं।

ललित कालिया ने बताया कि उनके पूर्वज गन्ने की खेती करते थे, लेकिन समय के साथ यह परंपरा समाप्त हो गई थी। उन्होंने पिछले सीजन में इसे पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। शुरुआत में लोगों ने इसे असंभव बताया, लेकिन उनकी मेहनत रंग लाई और फसल सफलतापूर्वक तैयार हुई।खास बात यह रही कि गन्ने की इस फसल में एक बार भी सिंचाई नहीं करनी पड़ी। जंगली सूअरों द्वारा आधी फसल नुकसान पहुंचाने के बावजूद उत्पादन संतोषजनक रहा। उन्होंने खुद ही गन्ने की पेराई कर लगभग 70 किलो शक्कर तैयार की।उन्होंने यह भी बताया कि गन्ने की फसल 5 से 7 वर्षों तक दोबारा बोने की आवश्यकता के बिना चल सकती है, जिससे किसानों की लागत कम होती है। साथ ही, वह पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए भी प्रयासरत हैं, जो पोषक होने के साथ कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देते हैं।यह पहल हमीरपुर के किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है।

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