मंडी, धर्मवीर -: देश में महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। एक ओर भाजपा इस बिल को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसके क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठा रही है। इसी क्रम में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के धर्मपुर से कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ठाकुर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
वीरवार को मंडी में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान चंद्रशेखर ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह इसके सही और पारदर्शी तरीके से लागू किए जाने की पक्षधर है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना किसी स्पष्ट मसौदे और तैयारी के यह बिल लेकर आई है, जो उसकी जल्दबाजी और राजनीतिक मंशा को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि भाजपा पहले इस बिल को लेकर अलग रुख अपनाती रही है, लेकिन अब अचानक विशेष सत्र बुलाकर इसे पेश करना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना था कि यदि सरकार गंभीर होती तो इसे शीतकालीन सत्र में विधिवत तैयारी के साथ लाया जा सकता था। विपक्ष को विश्वास में लिए बिना इस तरह का महत्वपूर्ण निर्णय लेना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
चंद्रशेखर ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से यह बिल जल्दबाजी में पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि इसमें जनगणना और परिसीमन (डीलिमिटेशन) जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जो इसकी व्यवहारिकता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।उन्होंने कहा कि भाजपा खुद को महिला हितैषी बताती है, तो उसे राज्यों में तत्काल प्रभाव से 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जगहों पर 50 प्रतिशत आरक्षण की बात करना केवल भ्रम फैलाने का प्रयास है, जिससे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है।
कांग्रेस विधायक ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए विपक्ष पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में किए जा रहे वादे और गारंटियां केवल राजनीतिक जुमले बनकर रह गए हैं, जिनका जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिखता।इस मौके पर पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, अलकनंदा हांडा, राजेंद्र मोहन, दीपक शर्मा, शशी शर्मा, संजीव गुलेरिया और लाल सिंह कौशल सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन इसे सही प्रक्रिया और स्पष्ट नीति के तहत लागू करना जरूरी है।कुल मिलाकर, महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है, और आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।