Summer express, सुन्दर कुंडू, पलवल। जिले में किसानों को पारंपरिक खेती से हटाकर बागवानी की ओर प्रोत्साहित करने के लिए बागवानी विभाग सक्रिय रूप से काम कर रहा है। विभाग की ओर से संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिसके तहत किसानों को पॉलीहाउस और नेट हाउस लगाने पर आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है।
जिला बागवानी अधिकारी डॉ. पुष्पेंद्र चौहान ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा पॉलीहाउस और नेट हाउस स्थापित करने के लिए सामान्य श्रेणी के किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों को यह अनुदान 85 प्रतिशत तक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से किसान खीरा, टमाटर, शिमला मिर्च सहित अन्य सब्जियों के साथ-साथ फूलों की खेती भी कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती के तहत फसलों को मौसम की मार से बचाया जा सकता है, जिससे उत्पादन में वृद्धि होती है और किसानों की आय में भी सुधार आता है। खुले खेतों में खेती करने पर फसलों को बदलते मौसम और बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जिससे कीट नियंत्रण और खरपतवार प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। ऐसे में पॉलीहाउस जैसी तकनीक किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रही है।
डॉ. चौहान ने यह भी बताया कि पलवल जिले की भौगोलिक स्थिति किसानों के लिए अनुकूल है, क्योंकि यहां से फरीदाबाद, गुरुग्राम और दिल्ली की बड़ी मंडियां नजदीक हैं। ऐसे में बागवानी फसलों का उत्पादन कर किसान आसानी से अपनी उपज बाजार तक पहुंचाकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
वहीं, गांव बाता के प्रगतिशील किसान भोजपाल ने बताया कि उन्होंने बागवानी विभाग की मदद से अपने खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया है, जहां वे भिंडी, शिमला मिर्च, टमाटर और खीरे की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग की योजनाओं से किसानों को आर्थिक सहयोग मिल रहा है और बागवानी फसलें नकदी फसल होने के कारण रोजाना आय का स्रोत बनती हैं।
किसान भोजपाल ने अन्य किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बागवानी को अपनाएं, जिससे उनकी आमदनी में स्थायी बढ़ोतरी हो सके और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।