Summer express/शिमला, संजू -:हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगम और पंचायती राज चुनावों की सरगर्मी अब तेज़ हो चुकी है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी चारों नगर निगमों में जीत का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस ने भी मजबूत प्रदर्शन का भरोसा जताते हुए चुनावी प्रचार को धार देने की रणनीति बनाई है।
कांग्रेस का कहना है कि पार्टी आगामी दिनों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाएगी, जिसमें राज्य सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों को प्रमुखता से जनता के बीच रखा जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार पर हिमाचल के साथ “सौतेला व्यवहार” करने के आरोपों को भी चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा।इस बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव विनोद जिंटा ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की सरकार ने हिमाचल को मिलने वाली आर्थिक सहायता में कटौती की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को मिलने वाली रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट भी बंद कर दी गई, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा। बावजूद इसके, उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने विकास कार्यों की गति को थमने नहीं दिया।जिंटा ने यह भी कहा कि भाजपा प्रदेश में आंतरिक गुटबाज़ी से जूझ रही है और पार्टी कई धड़ों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। उनके अनुसार भाजपा नेता एक-दूसरे को हराने में लगे हुए हैं, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए जिंटा ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक आपदा के समय हिमाचल दौरे के दौरान 1500 करोड़ रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की थी, लेकिन वह राशि आज तक राज्य को नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई है।संगठन में युवाओं को प्राथमिकता देने पर बोलते हुए जिंटा ने कहा कि राहुल गांधी की सोच के अनुरूप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने युवाओं को संगठन और सरकार में अहम जिम्मेदारियां दी हैं। इससे पार्टी को नई ऊर्जा मिली है।अंत में जिंटा ने दावा किया कि कांग्रेस आज भी देश और प्रदेश की सबसे मजबूत पार्टी है। वहीं भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वह चुनाव जीतने के बजाय सत्ता “हथियाने” में विश्वास रखती है, जैसा कि उन्होंने अन्य राज्यों में भी देखा है।अब देखना यह होगा कि चुनावी मैदान में किस पार्टी की रणनीति जनता को ज्यादा प्रभावित करती है।