Summer express/ऊना, राकेश -:हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में जिला परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस पार्टी ने ऊना और कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्रों से अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। एक निजी होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी नेताओं ने छह प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारने की जानकारी दी। इस दौरान सभी उम्मीदवारों को पार्टी का पटका पहनाकर मीडिया के सामने प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में ऊना और कुटलैहड़ के पूर्व एवं वर्तमान विधायक भी मौजूद रहे।
घोषित उम्मीदवारों में टक्का जिला परिषद वार्ड से सुमित शर्मा, धनेट वार्ड से रीना देवी, लठयानी से सत्य देवी, चताड़ा से दीक्षा सैनी, बेहड़ाला से सोनिया राणा और रायपुर सहोड़ा से प्रियंका शर्मा को मैदान में उतारा गया है। पार्टी नेताओं ने सभी प्रत्याशियों को मजबूत और जमीनी स्तर पर काम करने वाला बताते हुए उनकी जीत का दावा किया।हालांकि, उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान भी खुलकर सामने आ गई है, खासकर टक्का जिला परिषद वार्ड को लेकर स्थिति काफी पेचीदा हो गई है। दरअसल, कुछ दिन पहले कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देशराज गौतम ने ब्लॉक अध्यक्ष विवेक मिंका द्वारा घोषित सुमित शर्मा को अधिकृत उम्मीदवार मानने से इनकार कर दिया था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी संकेत दिए थे कि वह इस सीट से अपने बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शोभित गौतम को मैदान में उतारना चाहते हैं।लेकिन इस बयान के ठीक दो दिन बाद ही तस्वीर बदलती नजर आई। कुटलैहड़ से कांग्रेस विधायक और ब्लॉक अध्यक्ष विवेक मिंका ने एक अलग प्रेस वार्ता कर सुमित शर्मा को ही पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय स्थानीय नेतृत्व द्वारा नहीं बल्कि पार्टी के शीर्ष नेताओं से चर्चा के बाद लिया गया है। मिंका के अनुसार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल से भी बातचीत की गई है, जिसके बाद ही सुमित शर्मा के नाम पर सहमति बनी।विवेक मिंका ने सुमित शर्मा को एक अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया है और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है।
अब इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी को उजागर कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे या फिर पार्टी नेतृत्व किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस विवाद को कैसे सुलझाती है और इसका चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ता है।