Summer express, तेल अवीव I गाज़ा की नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश करने वाले सैकड़ों फ्लोटिला कार्यकर्ताओं को इजराइल ने हिरासत से रिहा कर देश से निर्वासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद कई देशों में इजराइल के खिलाफ नाराजगी बढ़ गई है और कई सरकारों ने विरोध दर्ज कराने के लिए इजराइली राजदूतों को तलब किया है।
जानकारी के अनुसार, करीब 420 कार्यकर्ताओं को विशेष विमानों के जरिए इजराइल से तुर्किये भेजा गया। गुरुवार शाम जब ये कार्यकर्ता इस्तांबुल पहुंचे तो उनके समर्थकों ने उनका स्वागत किया। विमान से उतरते समय कई कार्यकर्ता ‘फ्री फिलिस्तीन’ के नारे लगाते दिखाई दिए और समर्थन में हाथ उठाकर अभिवादन किया।
तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी ‘अनादोलु’ के मुताबिक, सभी कार्यकर्ताओं को चिकित्सकीय जांच के लिए मेडिकल टीमों के पास ले जाया जाएगा। वहीं, इजराइल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि फ्लोटिला अभियान में शामिल सभी विदेशी कार्यकर्ताओं को निर्वासित कर दिया गया है।
इस बीच, इजराइल में अरब समुदाय के अधिकारों के लिए काम करने वाले कानूनी संगठन ‘अदाला’ ने बताया कि इजराइली नागरिकता रखने वाले कार्यकर्ता ज़ोहर रेगेव को अदालत में सुनवाई के बाद रिहा कर दिया गया। उन पर अवैध रूप से इजराइल में प्रवेश और ठहरने के आरोप लगाए गए थे। रेगेव पहले भी गाज़ा जाने वाले फ्लोटिला अभियानों में हिस्सा ले चुके हैं।
फ्लोटिला अभियान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई मानवाधिकार संगठनों ने इजराइल की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि इजराइल का कहना है कि गाज़ा की समुद्री नाकेबंदी उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।