Summer express, करनाल। हरियाणा के करनाल जिले में करोड़ों रुपये के धान घोटाले का मामला सामने आया है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की जांच में दो राइस मिलों से करीब 36 हजार क्विंटल धान गायब मिला है, जिससे सरकार को 10 करोड़ 19 लाख 52 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। मामले में दो राइस मिल संचालकों, दो डीएफएससी निरीक्षकों और एक सहायक निरीक्षक के खिलाफ तरावड़ी थाना में धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब पूरे मामले की जांच पुलिस करेगी।
जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) मुकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने तरावड़ी स्थित बालाजी राइस मिल और विश्वकर्मा राइस मिल का भौतिक सत्यापन किया था। जांच के दौरान बालाजी राइस मिल में करीब 10 हजार क्विंटल धान कम पाया गया। इसके अलावा मिल के अंदर लगी मशीनरी भी चालू हालत में नहीं मिली और वहां कबाड़ जैसी स्क्रैप मशीनें पाई गईं। जांच में सामने आया कि मिल में धान की निगरानी की जिम्मेदारी डीएफएससी निरीक्षक देवेंद्र, जो फिलहाल निलंबित हैं, और सहायक निरीक्षक रामफल, जिन्हें बर्खास्त किया जा चुका है, के पास थी। वहीं मिल मालिक मोहित, सुरेंद्र और उनके पार्टनर अरुण सरकार को धान के बदले चावल उपलब्ध करवाने के जिम्मेदार थे, लेकिन गायब धान को लेकर कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।
डीएफएससी की शिकायत के आधार पर तरावड़ी थाना पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी राजपाल ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
वहीं विश्वकर्मा राइस मिल के सत्यापन में करीब 26 हजार क्विंटल धान गायब मिला। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मिल में धान से चावल बनाने के लिए जरूरी मशीनें तक मौजूद नहीं थीं। इससे विभाग को संदेह हुआ कि मिल को गलत तरीके से धान आवंटित किया गया था। जांच में धान आवंटन पर डीएफएससी निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल के हस्ताक्षर भी मिले हैं। आरोप है कि मिल संचालक महेंद्र जांगड़ा ने विभागीय अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी तरीके से धान की अलॉटमेंट करवाई थी। इस मामले में मिल संचालक महेंद्र जांगड़ा, निरीक्षक हिमांशु और सहायक निरीक्षक रामफल के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अनुसार, विश्वकर्मा राइस मिल ने सरकार को एक दाना चावल तक वापस नहीं किया, जबकि बालाजी राइस मिल ने भी बेहद कम मात्रा में चावल जमा कराया। इसी के बाद विभाग को गड़बड़ी का शक हुआ और भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में सामने आए इस बड़े घोटाले के बाद विभाग और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि धान वास्तव में मिलों तक पहुंचा था या अधिकारियों और मिल संचालकों की मिलीभगत से उसे बाजार में बेच दिया गया।