Summer express, नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती सोने की कीमतों और आयात शुल्क में हालिया बढ़ोतरी का असर अब ज्वेलरी कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में संगठित स्वर्ण आभूषण खुदरा क्षेत्र की बिक्री मात्रा के लिहाज से 13 से 15 प्रतिशत तक घट सकती है। इससे पहले पिछले वित्त वर्ष में भी सोने के आभूषणों की बिक्री में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही बिक्री की मात्रा कम हो रही हो, लेकिन सोने की ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी होने की संभावना है। प्रति यूनिट अधिक कीमत मिलने से इस क्षेत्र का कुल कारोबार 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। हालांकि, कंपनियों पर कार्यशील पूंजी और इन्वेंट्री लागत का दबाव बना रहेगा।
क्रिसिल के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 720 टन सोने का आयात किया, जिस पर करीब 72 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा खर्च हुई। व्यापार घाटा कम करने और रुपये को मजबूती देने के उद्देश्य से सरकार ने हाल ही में सोने पर सीमा शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और रुपये में कमजोरी के चलते पिछले वर्ष घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 55 प्रतिशत की तेजी आई। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर पड़ा है। अब लोग महंगे भारी आभूषणों की बजाय हल्के वजन और कम कैरेट वाले गहनों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सोने की बढ़ती कीमतों के बीच निवेश के तौर पर इसकी मांग में तेजी देखी जा रही है। पिछले दो वर्षों में सोने की छड़ों और सिक्कों की बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि आभूषणों की मांग में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई है।
क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक हिमांक शर्मा के मुताबिक, आयात शुल्क में वृद्धि से मांग पर और दबाव बढ़ सकता है। उनका अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में आभूषणों की कुल बिक्री घटकर 620 से 640 टन तक रह सकती है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आयात नीति में बदलाव और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद आने वाले समय में इस सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बने रहेंगे। वहीं संगठित ज्वेलरी कंपनियां फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए छोटे शहरों तक विस्तार कर रही हैं, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो रही है।