Summer express, यमुनानगर। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सोमवार को जिले के किसानों और भूमि मालिकों ने सरकार की भूमि अधिग्रहण एवं ट्रांसमिशन लाइन मुआवजा नीति के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने नई अधिसूचना को किसान विरोधी बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन से पहले बड़ी संख्या में किसान जगाधरी नई अनाज मंडी में एकत्रित हुए, जहां बैठक आयोजित कर सरकार द्वारा 29 अप्रैल 2026 को जारी अधिसूचना पर चर्चा की गई। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि नई नीति के तहत प्रभावित किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल पाएगा। बैठक के बाद किसानों ने मंडी से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला और वहां धरना देकर विरोध जताया।
लघु सचिवालय पहुंचकर किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं और राइट ऑफ वे (ROW) के तहत मुआवजा तय करने वाली अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए। किसानों का कहना है कि मुआवजा निर्धारण की वर्तमान प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे पावर ग्रिड, एचवीपीएनएल व अन्य कंपनियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
भाकियू नेता हरपाल सिंह ने कहा कि किसानों को उनकी जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य और भविष्य में होने वाले विकास को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि मुआवजा तय करने की प्रक्रिया में प्रभावित किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और पूरे प्रदेश में एक समान मुआवजा नीति लागू की जाए।
किसानों ने यह भी मांग उठाई कि प्रभावित लोगों और स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं को शामिल कर एक स्वतंत्र समीक्षा समिति बनाई जाए, ताकि मुआवजा प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से लागू हो सके।
किसान नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अधिसूचना वापस नहीं ली गई और मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।