Summer express/धर्मशाला, राहुल -:तिब्बत की निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति के रूप में पेनपा त्सेरिंग ने बुधवार को लगातार दूसरी बार शपथ ग्रहण की। हाल ही में संपन्न चुनावों में उन्हें दोबारा राष्ट्रपति चुना गया। हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज स्थित चुगलाखंग बौद्ध मठ में आयोजित भव्य समारोह में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा विशेष रूप से मौजूद रहे। समारोह में बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोग, धार्मिक प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
शपथ ग्रहण के बाद अपने संबोधन में पेनपा त्सेरिंग ने कहा कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य तिब्बत और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना होगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग बेहद जरूरी है और निर्वासित सरकार वैश्विक स्तर पर समर्थन जुटाने के प्रयास तेज करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि तिब्बती लोगों के अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।उन्होंने भारत में रह रहे तिब्बती समुदाय के कल्याण को भी सरकार की अहम जिम्मेदारी बताया। त्सेरिंग ने कहा कि भारत के 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बड़ी संख्या में तिब्बती शरणार्थी रह रहे हैं। उनकी सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही विदेशों में बसे तिब्बती समुदाय से भी बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा।
पेनपा त्सेरिंग ने निर्वासित प्रशासन में ई-गवर्नेंस को और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि नई तकनीकों का उपयोग कर प्रशासनिक सेवाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि दुनियाभर में रह रहे तिब्बती नागरिकों तक सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें।धर्मगुरु दलाईलामा के पुनर्जन्म के मुद्दे पर चीन की दखलंदाजी को लेकर भी उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि दलाईलामा का पुनर्जन्म पूरी तरह धार्मिक और आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए चीन को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। त्सेरिंग ने कहा कि पुनर्जन्म की परंपरा तिब्बती बौद्ध संस्कृति की विशेष पहचान है और इस पर निर्णय लेने का अधिकार केवल तिब्बती समुदाय को ही है।