Summer express/धर्मशाला, राहुल -:धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में पहली बार आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय तिब्बती सांस्कृतिक महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को तिब्बत की निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति पेम्पा छेरिंग ने किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और तिब्बत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को विस्तार से रेखांकित किया।
पेम्पा छेरिंग ने कहा कि तिब्बती समुदाय पिछले 65 वर्षों से निर्वासन का जीवन जी रहा है।लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि भारत के लोग तिब्बत और उसकी संस्कृति के बारे में अच्छी जानकारी रखते होंगे, लेकिन आम लोगों से बातचीत के दौरान यह महसूस हुआ कि नई पीढ़ी को तिब्बत के इतिहास और उसकी सांस्कृतिक विरासत के बारे में बहुत कम जानकारी है।इसी सोच के साथ धर्मशाला में इस सांस्कृतिक महोत्सव की शुरुआत की गई है, ताकि भारतीय समाज को तिब्बत की परंपराओं, संस्कृति और इतिहास से अवगत कराया जा सके।उन्होंने कहा कि भारत और तिब्बत के संबंध सदियों पुराने हैं। भारत-तिब्बत सीमा अरुणाचल प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर तक फैली हुई है।तिब्बती भाषा और उसकी लिपि की जड़ें भी भारत से जुड़ी हुई हैं। बौद्ध धर्म तथा नालंदा परंपरा आठवीं शताब्दी में भारत से तिब्बत पहुंची और वहां की संस्कृति का अहम हिस्सा बनी।बौद्ध शिक्षाओं का तिब्बती भाषा में अनुवाद कर उन्हें संरक्षित किया गया, जिससे यह विरासत आज भी जीवित है।पेम्पा छेरिंग ने कहा कि धर्मशाला में आयोजित यह महोत्सव भविष्य के लिए एक नई शुरुआत है। यदि पर्याप्त सहयोग और फंडिंग मिलती है तो आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों और शहरों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तिब्बती समुदाय को यहां हर संभव सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है।