Summer express, नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच कांग्रेस अब राज्य में नई रणनीति पर काम करती नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान ‘केरल मॉडल’ की तर्ज पर युवा चेहरों को आगे बढ़ाते हुए नए मंत्रिमंडल का गठन कर सकता है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि डी.के. शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो मौजूदा सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। संभावित फेरबदल में समाज कल्याण मंत्री एच.सी. महादेवप्पा, ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज और गृह मंत्री जी. परमेश्वर जैसे अनुभवी नेताओं के नाम चर्चा में हैं।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व युवा और ऊर्जावान टीम तैयार करने के पक्ष में है। यह रणनीति लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उस सोच से मेल खाती है, जिसमें पार्टी संगठन और सरकार में युवा नेताओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ द्वारा अपनाए गए मॉडल को कर्नाटक में भी लागू करने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और मंत्रिमंडल गठन में अनुभव को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व युवा और अनुभवी नेताओं के संतुलन वाला फॉर्मूला तैयार कर सकता है।
बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया सरकार के करीब 15 मौजूदा मंत्रियों को बरकरार रखा जा सकता है, जबकि कुछ नए चेहरों को भी मौका मिल सकता है। वहीं शिवकुमार खेमे के नेताओं को भी नई कैबिनेट में अहम जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है।
कर्नाटक मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित कुल 34 पद हैं। वर्तमान में तीन पद पहले से खाली हैं। ऐसे में नए मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की गुंजाइश बनी हुई है।
पूर्व मंत्री आर.वी. देशपांडे ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार चलाने के लिए अनुभव और नई सोच दोनों जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि केवल नए चेहरों के भरोसे सरकार नहीं चलाई जा सकती और अनुभवी नेताओं की भूमिका भी अहम बनी रहती है।