Summer express, कुवैत सिटी। मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। कुवैत की सेना ने सोमवार को घोषणा की कि देश की हवाई सुरक्षा प्रणाली दुश्मन की ओर से किए गए कथित मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला कर रही है। घटनाक्रम के बाद देशभर में सतर्कता बढ़ा दी गई है और नागरिकों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
कुवैती सेना के अनुसार, एयर डिफेंस सिस्टम को कई हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए सक्रिय किया गया। सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि यदि लोगों को आसमान में धमाकों की आवाज सुनाई दे, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह हवाई सुरक्षा प्रणाली द्वारा संभावित खतरों को इंटरसेप्ट किए जाने का परिणाम हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों से आपातकालीन निर्देशों का पालन करने और अफवाहों से बचने की अपील की है। घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले भी हाल के दिनों में कुवैत को मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंकाओं का सामना करना पड़ा था। क्षेत्रीय तनाव के बीच कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की गई।
इस बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान ने अपने कुछ भूमिगत मिसाइल ठिकानों और बंकरों को फिर से सक्रिय कर लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इन ठिकानों को पहले अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान निशाना बनाया गया था। हालांकि इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
उधर, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते तथा संघर्ष विराम को लेकर भी कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित मसौदे में 60 दिनों के संघर्ष विराम, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही को सुचारु बनाए रखने तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता फिर शुरू करने जैसे बिंदुओं पर चर्चा की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट किया है कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना प्रमुख शर्तों में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
मध्य पूर्व में लगातार बदलते घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब क्षेत्रीय सुरक्षा, कूटनीतिक प्रयासों और संभावित समझौतों पर टिकी हुई हैं।