Summer express, मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के दबाव में बाजार खुलते ही लाल निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 400 अंक तक फिसल गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी 23,250 के स्तर से नीचे पहुंच गया।
बाजार में आई इस तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। कारोबार शुरू होने के शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग 3.75 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है।
सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 26 गिरावट के साथ खुले। सबसे अधिक दबाव वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के शेयरों पर देखा गया। बजाज फाइनेंस में करीब 2.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), ट्रेंट, पावरग्रिड, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल और इटरनल जैसे शेयर भी नुकसान में रहे।
हालांकि आईटी सेक्टर ने कुछ राहत दी। इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे गिरावट का दायरा कुछ हद तक सीमित रहा।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्रीय हालात सामान्य नहीं होते और उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं तो वह अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं को रोक सकता है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी ने भी वैश्विक बाजारों में बेचैनी पैदा कर दी है। यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ चल रही बातचीत के समाप्त होने से उन्हें विशेष फर्क नहीं पड़ता।
इन घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में हल्की नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड का भाव मामूली गिरावट के साथ 94.56 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर जारी रहेगा, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।