Summer express, मुंबई। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत कमजोर रही और प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक संकेतों के दबाव में बाजार लाल निशान में खुला।
सुबह के कारोबार में बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 780 अंकों की गिरावट के साथ 73,867 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 200 अंक टूटकर 23,285 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसी वजह से घरेलू बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। विदेशी बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को प्रभावित किया।
हालांकि एशियाई बाजारों में तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। जापान के शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। वहां का प्रमुख निक्केई 225 सूचकांक करीब 1,400 अंक की बढ़त के साथ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इसके साथ ही टॉपिक्स इंडेक्स में भी मजबूती दर्ज की गई, जिससे जापानी बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत दिखाई दिया।
दूसरी ओर हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक दबाव में रहा और इसमें एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहा।
कमोडिटी बाजार में भी भू-राजनीतिक तनाव का असर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही। डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड दोनों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त दर्ज की गई, जबकि भारतीय रुपया दबाव में रहा। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर बंद हुआ था।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।