Summer express, नई दिल्ली | सोना रिफाइनिंग और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की सख्त कार्रवाई के बाद कंपनी के शेयरों में गुरुवार को भारी दबाव देखने को मिला। बाजार खुलते ही कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
सेबी ने कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए वित्तीय रिपोर्टिंग में गंभीर अनियमितताओं और जांच प्रक्रिया में अपेक्षित सहयोग नहीं करने को लेकर चिंता जताई है। नियामक संस्था के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि कंपनी ने अपने राजस्व आंकड़ों को वास्तविक स्थिति से कहीं अधिक दर्शाया हो सकता है।
बीएसई पर कंपनी का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 110.15 रुपये पर बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार को यह गिरकर 104.65 रुपये पर पहुंच गया। पिछले एक वर्ष में कंपनी के शेयर का उच्चतम स्तर 239 रुपये और न्यूनतम स्तर 80.11 रुपये दर्ज किया गया है।
सेबी ने 3 जून को जारी अपने अंतरिम आदेश में कहा कि फोरेंसिक ऑडिट और जांच के दौरान वित्तीय दस्तावेजों में कई विसंगतियां सामने आई हैं। नियामक के मुताबिक, कंपनी के राजस्व से संबंधित आंकड़ों में बड़े स्तर पर अंतर पाया गया है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
मामले की शुरुआत मार्च 2024 में हुई शिकायत से हुई थी, जिसमें कंपनी के खातों में दर्शाए गए बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि के वित्तीय लेन-देन और खातों की जांच शुरू की। जांच के लिए बीडीओ इंडिया सर्विसेज को फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया गया।
जांच के दौरान सेबी ने कंपनी से कई वित्तीय दस्तावेज और संबंधित पक्षों के साथ हुए लेन-देन का विवरण मांगा था। नियामक का आरोप है कि कंपनी ने सभी आवश्यक जानकारियां समय पर उपलब्ध नहीं कराईं, जिससे जांच प्रभावित हुई।
राजेश एक्सपोर्ट्स घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने के उत्पादों के कारोबार से जुड़ी प्रमुख कंपनियों में से एक है। कंपनी ‘शुभ जूलर्स’ ब्रांड के तहत ज्वेलरी स्टोर्स भी संचालित करती है। जांच के दायरे में कंपनी की विदेशी सहायक इकाइयों, विशेष रूप से सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित कारोबार से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
अंतरिम आदेश के तहत सेबी ने प्रमोटर राजेश मेहता को अगली सूचना तक कंपनी की प्रतिभूतियों में किसी भी प्रकार के लेन-देन से प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही कंपनी को 30 दिनों के भीतर जांच से संबंधित सभी लंबित दस्तावेज और सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की कार्रवाई के बाद निवेशकों की नजर अब जांच के अगले चरण और कंपनी की प्रतिक्रिया पर बनी रहेगी।