Summer express, कुरुक्षेत्र। सरकारी गेहूं के स्टॉक पर पानी की बौछारें छोड़ने के विवाद ने अब राजनीतिक और किसान संगठनों के स्तर पर तूल पकड़ लिया है। मामले में निलंबित किए जा चुके खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर अंकुर जांगड़ा के खिलाफ अब शहीद भगत सिंह किसान यूनियन ने आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी है। यूनियन का कहना है कि केवल निलंबन जैसी विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
इसी मांग को लेकर यूनियन ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसान संगठन के कार्यकर्ता अनाज मंडी से बीआर इंटरनेशनल चौक तक रोष मार्च निकालेंगे। प्रदर्शन के दौरान सरकार का प्रतीकात्मक पुतला तैयार कर उसकी आंखों और मुंह पर काली पट्टी बांधी जाएगी तथा चौक पर उसका दहन किया जाएगा।
यूनियन के महासचिव संजीव आलमपुर ने कहा कि सरकारी गेहूं को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर मामले में सिर्फ निलंबन कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि इसी प्रकार की लापरवाही कोई आम नागरिक करता तो उसके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाती। ऐसे में संबंधित अधिकारी के खिलाफ भी समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसान यूनियन इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी बात रखेगी। संगठन का आरोप है कि प्रशासन और सरकार केवल विभागीय कार्रवाई कर मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
किसान नेताओं ने सरकार पर विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान काली पट्टी बांधकर यह संदेश दिया जाएगा कि सरकार जनता की चिंताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों को देखने और सुनने को तैयार नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले महीने सरकारी गेहूं के भंडारण स्थल पर पानी के छिड़काव का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। 22 मई को उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के निर्देश पर शाहाबाद के एसडीएम शंभू राठी की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई थी, जिसे निर्धारित समय में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
जांच रिपोर्ट में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर अंकुर जांगड़ा की लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय, सिरसा निर्धारित किया गया है और बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगाई गई है।
अब किसान संगठनों के आंदोलन और गिरफ्तारी की मांग के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।