Sunmer express, यमुनानगर। जिले में सामने आए करीब 70 करोड़ रुपये के बहुचर्चित धान घोटाले की जांच को 237 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामले में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। करोड़ों रुपये के इस घोटाले के खुलासे के बाद प्रशासन और जांच एजेंसियों ने सख्त कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए जांच की रफ्तार पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच थाना प्रभारियों को शामिल कर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी को घोटाले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, अब तक की कार्रवाई केवल तीन आरोपितों की गिरफ्तारी तक ही सीमित रही है। इसके चलते घोटाले से जुड़े अन्य संदिग्धों और आरोपितों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच के दौरान 30 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम सामने आ चुके हैं। दस्तावेजों और पूछताछ के आधार पर कई लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है, लेकिन अभी तक अधिकांश आरोपित जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं। इससे मामले में कार्रवाई की गति को लेकर आम लोगों और संबंधित पक्षों में नाराजगी देखी जा रही है।
इस घोटाले के मुख्य आरोपित छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को अब तक अदालत से जमानत नहीं मिल सकी है। उनकी जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। जांच एजेंसियां मामले में साक्ष्य जुटाने और अन्य आरोपितों की तलाश में जुटी हुई हैं।
करीब आठ महीने बाद भी घोटाले की जांच पूरी न होने और कई संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई लंबित रहने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब लोगों की निगाहें एसआईटी की आगामी कार्रवाई और अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।