अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर पुलिस और विशेष जांच दल (एसआईटी) आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर इस मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से फिलहाल इनकार कर दिया है।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं से निर्धारित प्रक्रिया के तहत पहले अर्जेंसी (तत्काल सुनवाई) का अनुरोध करने को कहा है।
इस बीच, सभी आठ आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस आरोपियों की रिमांड नहीं मांगा। फिर कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। तब तक आरोपी जेल में ही रहेंगे। वहीं, जांच एजेंसियों के अनुसार, चढ़ावे से जुड़े धन के जमा होने और बैंक खातों में
हुए लेनदेन की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस संबंधित बैंकों से खातों का विवरण, लेनदेन का रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज जुटा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गड़बड़ियों में किसी प्रकार की वित्तीय हेराफेरी हुई या नहीं। जांच के दूसरे चरण में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और उनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड, दान रजिस्टर, ऑडिट दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि जांच प्रभावित न हो। हालांकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि तत्काल सुनवाई के लिए पहले नियमानुसार अर्जेंसी आवेदन देना होगा।
सुरक्षा संबंधी कमियां: उधर, एसआईटी अपनी जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ा रही है। प्रारंभिक जांच में मंदिर परिसर की निगरानी व्यवस्था, नकदी गिनने की प्रक्रिया, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और बैंक में नकदी जमा करने की प्रणाली में कुछ प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आने की बात कही गई है। हालांकि एसआईटी ने अभी किसी भी व्यक्ति को अंतिम रूप से दोषी नहीं ठहराया है और
जांच जारी है।