Summer express, नई दिल्ली। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। आरोपी सिया गोयल का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई साहिल गोयल को कथित मानहानिकारक बयान देने के आरोप में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का कानूनी नोटिस भेजा है।
अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव की ओर से भेजे गए नोटिस में दावा किया गया है कि सिया गोयल ने विधिवत हस्ताक्षरित वकालतनामे के माध्यम से उन्हें अपना कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त किया था। नोटिस के अनुसार, यह नियुक्ति किसी मौखिक दावे या मीडिया में दिए गए बयान पर आधारित नहीं, बल्कि आरोपी द्वारा स्वेच्छा से प्रदान किया गया वैध कानूनी अधिकार है। इसमें यह भी कहा गया है कि संबंधित वकालतनामा सक्षम न्यायालय में पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य मूल दस्तावेज भी अदालत के समक्ष पेश किए जा सकते हैं।
नोटिस में आरोप लगाया गया है कि साहिल गोयल ने मीडिया के जरिए अधिवक्ता श्रीवास्तव के खिलाफ झूठे, भ्रामक और मानहानिकारक आरोप लगाए, जिससे उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। अधिवक्ता का दावा है कि वडगांव मावल कोर्ट में उनका वकालतनामा रिकॉर्ड पर स्वीकार किया जा चुका है, इसके बावजूद उनके अधिकार पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए गए।
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित तथ्यों की पुष्टि किए बिना सार्वजनिक मंचों पर दिए गए बयानों से यह गलत संदेश गया कि अधिवक्ता ने आरोपी का प्रतिनिधित्व करने का झूठा दावा किया है या उन्होंने अनुचित तरीके से कार्य किया है। इसके चलते उन्हें कथित तौर पर ट्रोलिंग, धमकियों, आपत्तिजनक फोन कॉल, पेशेवर असुविधा और प्रतिष्ठा को नुकसान का सामना करना पड़ा।
नोटिस के माध्यम से साहिल गोयल से कथित मानहानिकारक बयानों को तत्काल वापस लेने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में ऐसे आरोप नहीं लगाने का लिखित आश्वासन देने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी, जिसमें 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का सिविल दावा भी शामिल हो सकता है।
यह विवाद मामले की सुनवाई से पहले तब सामने आया, जब साहिल गोयल ने मीडिया से बातचीत में अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव के सिया गोयल का प्रतिनिधित्व करने के अधिकार पर सवाल उठाए थे। साहिल का आरोप था कि परिवार ने श्रीवास्तव को न तो नियुक्त किया और न ही अधिकृत किया था। उन्होंने यह आशंका भी जताई थी कि सिया गोयल के हस्ताक्षर कथित रूप से भ्रामक तरीके से प्राप्त किए गए हो सकते हैं।
साहिल गोयल ने यह भी दावा किया कि परिवार ने आरोपी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिवक्ता विपुल दुशिंग को नियुक्त किया है और इस संबंध में अदालत में हलफनामा भी दायर किया गया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस विवाद के दौरान उन्हें धमकियां भी मिली हैं।
केतन अग्रवाल हत्याकांड में यह नया घटनाक्रम अब मुख्य आपराधिक मामले के साथ-साथ एक अलग कानूनी विवाद का रूप लेता नजर आ रहा है।