Summer express, राहुल चावला, धर्मशाला। पर्यटन नगरी धर्मशाला का विश्व प्रसिद्ध त्रियुंड ट्रैक इस वर्ष भी पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। हिमालय की खूबसूरत वादियों और रोमांचक ट्रैकिंग का आनंद लेने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। बढ़ती पर्यटक संख्या को देखते हुए वन विभाग ने ट्रैक के बेहतर संचालन, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।
डीएफओ धर्मशाला अमित शर्मा ने बताया कि त्रियुंड प्रदेश के सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग रूट्स में शामिल है, जहां हर साल हजारों भारतीय और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रैक के संचालन और निगरानी के लिए चार चेक पोस्ट स्थापित की गई हैं, जिनमें गल्लू मुख्य प्रवेश बिंदु के रूप में कार्य कर रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष पहली बार ट्रैक पर टिकट वसूली का कार्य टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से 86 लाख रुपये में आउटसोर्स किया गया है। पिछले वर्ष वन विभाग ने ट्रैकिंग शुल्क और टेंट पिचिंग से करीब 74 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया था। वहीं 10 जून तक के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल, मई और जून के तीन महीनों में करीब 26 हजार पर्यटक त्रियुंड ट्रैक पर पहुंच चुके हैं।
डीएफओ अमित शर्मा ने कहा कि अधिकांश पर्यटक जिम्मेदारी के साथ पर्यटन का आनंद लेते हैं, लेकिन कुछ लोग प्लास्टिक और अन्य कचरा पहाड़ों पर छोड़ जाते हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। ट्रैक की स्वच्छता बनाए रखने के लिए विभाग ने अधिकृत वेंडर को कचरा एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अलावा वन विभाग समय-समय पर विशेष सफाई अभियान भी चलाता है।
उन्होंने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भी त्रियुंड ट्रैक पर स्वच्छता अभियान चलाकर बड़ी मात्रा में कचरा एकत्र किया गया था। डीएफओ ने पर्यटकों से अपील की कि वे प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहयोग करें और अपने साथ ले जाए गए प्लास्टिक व अन्य कचरे को वापस लेकर आएं।
उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म सोसायटी जल्द ही ऐसी विशेष योजना शुरू करने जा रही है, जिसके तहत ट्रैक से कचरा वापस लाने वाले पर्यटकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।