Summer express/मंडी/ धर्मवीर -:राजीव गांधी वन संवर्धन योजना हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ मजबूत करने वाली प्रभावी पहल के रूप में सामने आ रही है। जनभागीदारी आधारित इस योजना के तहत महिला मंडलों और युवक मंडलों को पौधरोपण के साथ-साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इससे एक ओर प्रदेश के वन क्षेत्र का विस्तार और संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और संरक्षण के माध्यम से पौधों के जीवित रहने की दर को बढ़ाना भी है। वन विभाग का मानना है कि जब स्थानीय समुदाय स्वयं इस अभियान से जुड़ता है, तो पौधों की देखभाल अधिक जिम्मेदारी के साथ होती है और पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है। यही कारण है कि योजना को हरित विकास के एक सफल मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।योजना से जुड़ी महिला मंडलों और युवक मंडलों ने भी इसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लाभकारी बताया है। महिला मंडल बैला की प्रधान कमलेश, बघेला महिला मंडल की सदस्य सुरेंद्रा, एकता युवा मंडल के प्रधान भूपेंद्र कुमार, सिद्धि विनायक महिला मंडल की प्रधान गरीमा तथा वंदना महिला मंडल सेरला खाबू की महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का भी कार्य किया है। उनका कहना है कि सामुदायिक भागीदारी से वनों के संरक्षण का अभियान और अधिक प्रभावी बन रहा है।
मंडी वन वृत्त में भी इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 121.5 हेक्टेयर क्षेत्र में वन संवर्धन कार्यों को स्वीकृति दी गई, जिसके लिए लगभग 1 करोड़ 24 लाख 20 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई। अब तक 102.5 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और इस पर एक करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय उपलब्धि दर्ज की गई है।योजना के अंतर्गत मंडी वन वृत्त में 74 महिला एवं युवक मंडलों को जोड़ा गया है। इन समूहों को कुल 1 लाख 22 हजार 857 पौधे एवं पॉलियां उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि व्यापक स्तर पर पौधरोपण और उनके संरक्षण का कार्य किया जा सके। वन विभाग का कहना है कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के लक्ष्यों को भी मजबूती मिल रही है। राजीव गांधी वन संवर्धन योजना अब प्रदेश में हरित विकास और जनसहभागिता का एक सफल उदाहरण बनकर उभर रही है।