Summer express, शिमला। वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने एक बार फिर वेट लीज (Wet Lease) मॉडल पर बसें संचालित करने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 2200 करोड़ रुपये के घाटे के बावजूद निगम प्रबंधन अंतरराज्यीय रूटों पर इस व्यवस्था को दोबारा लागू करने की योजना बना रहा है। इस प्रस्ताव पर हाल ही में उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हुई निदेशक मंडल (बीओडी) की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई।
जानकारी के अनुसार, वेट लीज योजना का प्रस्ताव पहले से बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं था, लेकिन चर्चा के दौरान इसे विशेष प्रस्ताव के रूप में रखा गया। बीओडी ने एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
एचआरटीसी का मानना है कि दिल्ली, चंडीगढ़, अंबाला, पंजाब और अन्य राज्यों के लिए संचालित कई अंतरराज्यीय रूट लगातार घाटे में चल रहे हैं। ऐसे में वेट लीज मॉडल के जरिए इन मार्गों पर बस सेवाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने का प्रयास किया जाएगा।
एचआरटीसी ने इससे पहले भी वेट लीज योजना लागू की थी। उस समय इस मॉडल के तहत लग्जरी, डीलक्स और कुछ साधारण बसों सहित करीब 120 बसें विभिन्न रूटों पर चलाई गई थीं। शिमला, धर्मशाला, चंबा, कुल्लू-मनाली समेत कई प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए बस सेवाएं संचालित की गई थीं। योजना के तहत बस संचालकों को तय दर के अनुसार प्रति किलोमीटर भुगतान किया जाता था। कुछ मामलों में डीजल की व्यवस्था एचआरटीसी करता था, जबकि कुछ रूटों पर निजी ऑपरेटर स्वयं ईंधन उपलब्ध कराते थे।
निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना को दोबारा शुरू करने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला, कई रूटों पर लगातार आर्थिक नुकसान हो रहा है और दूसरा, निजी ऑपरेटरों की ओर से नए रूटों पर बसें चलाने में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई जा रही। पिछले तीन वर्षों में परिवहन विभाग 250 से अधिक रूट निजी ऑपरेटरों को आवंटित करने के लिए आवेदन मांग चुका है, लेकिन केवल 52 रूटों पर ही बस संचालन शुरू हो सका।
हालांकि, वेट लीज योजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली के कार्यकाल में शुरू की गई इस व्यवस्था का एचआरटीसी कर्मचारियों ने विरोध किया था। उस समय निजी ऑपरेटरों को अधिक भुगतान, संचालन में मनमानी और अन्य राज्यों से अवैध सामान ढोने जैसे आरोप लगाए गए थे। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद इस योजना को बंद कर दिया गया था।
अब एक बार फिर एचआरटीसी इस मॉडल को नई रणनीति के साथ लागू करने की तैयारी कर रहा है। निगम का उद्देश्य घाटे वाले रूटों पर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को सुचारु बनाए रखना और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।