Summer express/शिमला,संजू-: NEET पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर हिमाचल प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की मांगों और आंदोलन को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसका खामियाजा केंद्र सरकार को उठाना पड़ा।
नरेश चौहान ने कहा कि NEET पेपर लीक ने देशभर के लाखों छात्रों का भरोसा कमजोर किया। उनका आरोप था कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई छात्रों ने अपनी जान गंवाई, लेकिन केंद्र सरकार ने समय पर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत में ही सरकार नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए आवश्यक कदम उठाती, तो देशव्यापी छात्र आंदोलन की नौबत नहीं आती।उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे छात्र केवल परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी आवाज को हल्के में लिया गया। चौहान ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और उनके आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा जाना चाहिए।
प्रधान मीडिया सलाहकार ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे को भी केंद्र सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया, जिसका राजनीतिक असर देखने को मिला। उनका कहना था कि लोकतंत्र में संवाद और संवेदनशीलता जरूरी है, लेकिन केंद्र सरकार इन दोनों मोर्चों पर विफल रही।हिमाचल प्रदेश सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए चौहान ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में एक भी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के समय कई पेपर लीक हुए थे और परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने पिछली सरकार की तुलना में अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं।