दलजीत विक्की | लुधियाना
समर न्यूज
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी के सदस्य एवं पूर्व विधायक रणजीत सिंह ढिल्लों ने सभी केंद्रीय राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व से राज्य के लंबे समय से लंबित और संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट एवं लिखित रुख सार्वजनिक करने की मांग की है।
लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को वोट मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन पंजाब की जनता को भी यह जानने का अधिकार है कि राज्य से जुड़े मूलभूत और ऐतिहासिक मुद्दों पर उनकी क्या नीति है।
रणजीत ढिल्लों ने कहा कि आजादी के कई दशक बीत जाने के बावजूद पंजाब से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले अब भी लंबित हैं। इनमें चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपना, सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद, पंजाब के नदी जल अधिकार, राजस्थान को दिए जा रहे पानी की रॉयल्टी, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड तथा पंजाब विश्वविद्यालय के प्रबंधन को पंजाब सरकार के अधीन लाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने अशांत दौर के दौरान राज्य में तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों के खर्च की बकाया राशि और उस पर लगे ब्याज को समाप्त करने की भी मांग उठाई।
पंजाब को अधिक प्रशासनिक, वित्तीय और संवैधानिक अधिकार मिलने चाहिए। सीमावर्ती राज्य होने के कारण विशेष आर्थिक पैकेज, उद्योगों को कर राहत, मालभाड़ा सब्सिडी, किसानों के लिए फसलों का लाभकारी मूल्य, एमएसपी की कानूनी गारंटी और कर्ज राहत जैसे मुद्दों पर भी केंद्रीय दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। इसके अलावा करतारपुर कॉरिडोर को स्थायी रूप से सरल और सुगम बनाए रखने, अटारी-वाघा सीमा से व्यापार दोबारा शुरू करने, पंजाबी भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण तथा रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक परियोजनाओं में पंजाब को अन्य राज्यों के समान भागीदारी देने जैसे विषयों पर भी स्पष्ट नीति सामने रखी जानी चाहिए।
रणजीत ढिल्लों ने कहा कि पंजाब के मतदाता अब केवल चुनावी वादों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि हर केंद्रीय राजनीतिक दल से इन ऐतिहासिक और बुनियादी मुद्दों पर स्पष्ट एवं लिखित जवाब चाहते हैं। उन्होंने पंजाब के पत्रकार समुदाय से भी अपील की कि वे चुनाव से पहले राष्ट्रीय नेतृत्व से इन सभी मुद्दों पर स्पष्ट जवाब लेकर जनता के सामने रखें।