सुनील शिंगार | लुधियाना
समर न्यूज
रेलवे स्टेशन के पार्सल विभाग के बाहर खड़े हुए एजेंटों के दावे हैं कि उनकी अंदर सेटिंग है। सरकारी बिल्डिंग के बाहर खड़े होकर मासूम लोगों से बेधड़क पैसे पकड़ रहे हैं और धड़ाधड़ बाइक भी पार्सल किया जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर यह सेटिंग है क्या? कौन है इस सेटिंग का गॉडफादर। क्योंकि खाली एजेंट ही गुनहगार नहीं है।
कोई भी कामकाज न होने की एवज में अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए वह तो मेहनत कर रहे हैं लेकिन हजारों रुपए तनख्वाह लेने के बाद भी कौन लोग सेटिंग कर रहे हैं। मंडल अधिकारियों का ही मानना है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच हो तो कई ऐसे अधिकारियों के नाम सामने आ सकते हैं जो कि चौंकाने वाले होंगे। इस बात का भी दावा करने से वह गुरेज नहीं कर रहे की निष्पक्ष जांच नहीं होगी।
परेशान व्यक्ति ही पहुंचता है एजेंटों के पास
पार्सल विभाग में जब कोई व्यक्ति सीधे तौर पर जाए और बाइक बुक करवाना चाहे तो उसके लिए कई नियम है। जैसे की वाहन के मालिक का वहां होना अनिवार्य है वाहन के पूरे दस्तावेज, टैंक फुल, नियमित पैकिंग, इत्यादि बहुत कुछ। छोटी सी भी गलती पाए जाने पर उसको साफ मना कर दिया जाता है कि उसका मोटरसाइकिल रेल रास्ते नहीं भेजा जा सकता। ऐसे में आम व्यक्ति परेशान होकर सीधे वहां सतर्क एजेंट के पास जाता है। किसी तरह अपना बाइक गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वह मजबूर हो चुका होता है। यहां पर होता है सेटिंग का खेल शुरू। क्योंकि पहले से ही परेशान किया जा चुका व्यक्ति डरा सहमा होता है कि आखिर उसकी बाइक गंतव्य तक पहुंचेगी या नहीं। फिर पहले से ही उक्त पूरे मामले का जानकार एजेंट उक्त व्यक्ति से मनचाहे पैसे लेते हैं और सभी नियम ताक पर रख बाइक बुक कर करवा देते हैं।
समर सेकंड पर्सन
^मुझे लुधियाना से सीतामढ़ी के लिए मोटरसाइकिल बुक करवाना था तो मैं लुधियाना रेलवे स्टेशन के पार्सल विभाग गया। वहां एक बड़ी बिल्डिंग के बाहर खड़े हुए कुछ लोगों ने मुझ से बाइक बुक करवाने के नाम पर 4 हजार रुपए ले लिए। जो उन्होंने मुझे पर्ची दी वह मात्र 1663 रुपए की थी। जब उनसे ज्यादा पैसे लेने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि हमें अंदर भी खर्चे देने पड़ते हैं।
-रूपेश पटेल, बिल्टी नंबर 384006
समर फर्स्ट पर्सन
^गाजीपुर के लिए मोटरसाइकिल भेजना था। लुधियाना रेलवे स्टेशन के पार्सल विभाग में गया जहां पर एजेंट मिला और वह मुझे वहां से बाहर ले आया। वहां जाकर उसने मुझे बाइक गाजीपुर भेजने के नाम पर 3600 रुपए ले लिए। 2 घंटे बाद उसने रसीद दी जिस पर 1404 रुपए लिखे हुए थे। पूछने पर उक्त एजेंट ने बताया कि बहुत सारे खर्चे हैं जो कि हमें अदा करने पड़ते हैं। मुझे बाइक जरूरी भेजना था जिसके कारण मैं चुप रहा। विभाग के अंदर ही एजेंट का सतर्क होना कहीं ना कहीं मिली भगत है। -रूप चंद, बिल्टी नंबर 384496