Summer express, सुंदर कुंडू, मुजफ्फरनगर। सावन माह और कांवड़ यात्रा के बीच उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से आस्था और मातृत्व का अनोखा संगम देखने को मिला। नीलकंठ से कांवड़ लेकर लौट रही एक महिला कांवड़िया ने रास्ते में प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल में जुड़वा बेटों को जन्म दिया। सावन के पहले सोमवार को हुई इस घटना ने श्रद्धालुओं और अस्पताल स्टाफ को भावुक कर दिया। बाद में दोनों नवजातों का नाम गणेश और कार्तिकेय रखा गया।
जानकारी के अनुसार दिल्ली के भलस्वा क्षेत्र की रहने वाली 20 वर्षीय नेहा अपने साथियों के साथ नीलकंठ से कांवड़ लेकर लौट रही थी। सोमवार को मुजफ्फरनगर पहुंचने पर सात माह की गर्भवती नेहा को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। उनके साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए नेहा को अपनी गाड़ी से जिला महिला अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में चिकित्सकों ने तुरंत उपचार शुरू किया और सामान्य प्रसव के जरिए नेहा ने दो जुड़वा बेटों को जन्म दिया। समय से पहले जन्म होने के कारण दोनों नवजातों को विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार मां और दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
घटना की जानकारी मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय वर्मा भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने नेहा और नवजातों का हालचाल जाना तथा अस्पताल प्रशासन को बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एसएसपी ने नवजातों के लिए उपहार और मां को फल भेंट कर शुभकामनाएं दीं। नेहा की सहमति से उन्होंने दोनों बच्चों का नाम भगवान शिव के पुत्रों के नाम पर गणेश और कार्तिकेय रखा।
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मुरली भास्कर ने बताया कि महिला की सामान्य डिलीवरी हुई है और दोनों नवजातों की हालत स्थिर है। परिजनों को सूचना दे दी गई है और उनके मुजफ्फरनगर पहुंचने की प्रतीक्षा की जा रही है।
करीब 130 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा के दौरान सात माह की गर्भावस्था में नेहा का साहस और श्रद्धा चर्चा का विषय बना हुआ है। नेहा ने इसे भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि उसे अंदाजा नहीं था कि यात्रा के दौरान प्रसव हो जाएगा, लेकिन सब कुछ सकुशल होने से वह बेहद खुश है।