समर न्यूज। चंडीगढ़
पंजाब में उग्रवाद के दौर की हिंसक घटनाओं की राजनीतिक और सामाजिक स्मृति एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मौत की सजा पाए बलवंत सिंह राजोआना की ओर से उसके सहयोगी दिलावर सिंह को ‘कौमी शहीद’ कहकर श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया है। राजोआना की ओर से उसकी बहन के माध्यम से प्रकाशित विज्ञापनों में दिलावर सिंह के लिए यह संबोधन इस्तेमाल किया गया। दिलावर सिंह ने 1995 में बेअंत सिंह की हत्या में आत्मघाती हमलावर की भूमिका निभाई थी। राजोआना को इस मामले में मुख्य हमलावर का बैकअप बताया गया था।
31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब सचिवालय के पास हुए विस्फोट में बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में राजोआना को मौत की सजा सुनाई गई थी और वह फिलहाल पटियाला केंद्रीय जेल में बंद है। दिलावर सिंह को 2012 में अकाल तख्त की ओर से ‘कौमी शहीद’ का दर्जा दिए जाने के बाद इस शब्द को लेकर पंजाब में लंबे समय से मतभेद रहे हैं। एक पक्ष इसे उग्रवाद के दौर की कथित ज्यादतियों के विरोध में बलिदान की व्याख्या से जोड़ता है, जबकि दूसरे पक्ष के लिए यह निर्दोष लोगों की जान लेने वाली हिंसा को महिमामंडित करने का सवाल है।
राजोआना की श्रद्धांजलि ऐसे समय आई है जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सहित सिख धार्मिक संस्थाएं लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठा रही हैं। पंजाब के कई गुरुद्वारों में हाल में बंदी सिंहों की रिहाई के लिए अरदास भी की गई। राजोआना की मौत की सजा को लेकर उसकी याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई की संभावना भी बनी हुई है।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा की पैरोल का मामला भी चर्चा में है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उसकी बीमार मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल की सिफारिश राज्यपाल से की है। हवारा ने पहले भी पैरोल के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। बंदी सिंहों का मुद्दा पंजाब की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। हवारा की पैरोल के मामले में सरकार के रुख में बदलाव को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं, जबकि सरकार ने इसे मानवीय आधार पर उठाया गया कदम बताया है।
दूसरी ओर, सिख मुद्दों पर सक्रिय नए राजनीतिक समूहों के लिए यह मुद्दा अपना आधार मजबूत करने का अवसर बन रहा है। राजोआना का ताजा संदेश और हवारा की पैरोल का मामला सामने आने से राजनीतिक विमर्श तेज हो गया है।