summer express , चंडीगढ़। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच हरियाणा सरकार ने वायु और जल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई स्तरों पर प्रयास तेज कर दिए हैं। सीवेज प्रबंधन से लेकर औद्योगिक अपशिष्ट, पराली और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए विभागों को लंबित परियोजनाएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने वीरवार को यमुना एक्शन प्लान और एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि यमुना बेसिन में 132 एमएलडी क्षमता वाले छह नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जा रहे हैं। बजघेड़ा, खेड़वा, रादौर रोड, ददलाना, बादशाहपुर और सोढापुर में चल रही इन परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा गोहाना, सुनारिया, लाइन पार बहादुरगढ़, हसनपुर, धनवापुर और बहरामपुर में 304 एमएलडी क्षमता वाले छह एसटीपी के उन्नयन का काम भी जारी है। सरकार का उद्देश्य सीवेज के बेहतर उपचार के साथ नदियों और जलस्रोतों में प्रदूषित पानी के प्रवाह को रोकना है।
औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए फरीदाबाद के प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी क्षमता का साझा औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। पानीपत में ड्रेन नंबर-2 में औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह को रोकने के लिए 14 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर चार इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट जल प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी है। गांवों में इस दिशा में शुरू की गई 12 परियोजनाओं में से पांच पूरी हो चुकी हैं, जबकि सात परियोजनाओं पर काम जारी है। इन प्रयासों का मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में सीवेज और गंदे पानी के उचित प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करना है।
इसके साथ ही सोनीपत के राय-जाखौली में प्रतिदिन 400 टन कचरे की क्षमता वाला बायोगैस संयंत्र भी निर्माणाधीन है। सरकार इसे अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाओं में किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने यमुना एक्शन प्लान और एनसीआर की वायु गुणवत्ता सुधार से संबंधित कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित समयसीमा में परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर दिया।