Summer express, मोनिका रावत , चंडीगढ़ I नगर निगम चुनाव के लिए शुक्रवार को हुए वार्ड आरक्षण ड्रा में वार्ड-29, 4, 9, 15, 1, 3 और 32 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिए गए। इन सात वार्डों में से तीन वार्ड अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होंगे। इसके साथ ही नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। आरक्षण की इस तस्वीर के बाद कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी जमीन खिसक गई है और उन्हें अब दूसरे वार्डों में राजनीतिक भविष्य तलाशना होगा।
इस बार आरक्षण का ड्रा पहले से आरक्षित 16 वार्डों को छोड़कर बचे 19 वार्डों में से किया गया। इन्हीं 19 वार्डों में से सात एससी और नौ सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित किए जाने थे। सात एससी वार्डों में से तीन एससी महिला के लिए आरक्षित होने के कारण कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं। इस तरह बचे 19 वार्डों में से 16 आरक्षित हो गए और केवल तीन वार्ड ही अनारक्षित रहेंगे।
सात वार्डों पर आरक्षण, कई पार्षद प्रभावित
वार्ड-3 के भाजपा पार्षद दलीप शर्मा के लिए आरक्षण बड़ा झटका है। लगातार चुनाव जीतने के बाद तीसरी बार मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे दलीप शर्मा अब अपने मौजूदा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। उन्हें दूसरे वार्ड में राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी।
वार्ड-4 की भाजपा पार्षद एवं डिप्टी मेयर सुमन शर्मा भी आरक्षण से प्रभावित हुई हैं। मौजूदा वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने के बाद अब उन्हें दूसरे वार्ड से टिकट की दावेदारी करनी होगी।
वार्ड-9 की भाजपा पार्षद बिमला दुबे के लिए भी चुनावी समीकरण बदल गए हैं। वर्ष 2021 में वार्ड-7 एससी के लिए आरक्षित होने के कारण उन्होंने वार्ड-9 से चुनाव लड़ा था। अब वार्ड-9 के एससी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्हें फिर नई राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी।
वार्ड-15 के रामचंद्र यादव हाल ही में आप छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं। उनका वार्ड भी एससी के लिए आरक्षित हो गया है। ऐसे में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए उन्हें दूसरे वार्ड की तलाश करनी होगी।
वार्ड-29 के मुन्नवर भी आरक्षण से प्रभावित हुए हैं। आप की टिकट पर पार्षद बने मुन्नवर अब कांग्रेस में हैं। उनके वार्ड के एससी के लिए आरक्षित होने के बाद पार्टी के भीतर उनकी अगली चुनावी भूमिका पर भी नए सिरे से फैसला होगा।
वार्ड-32 के भाजपा पार्षद एवं सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह की सीट भी एससी के लिए आरक्षित हो गई है। ऐसे में उन्हें भी नए वार्ड से टिकट की तलाश करनी होगी।
वार्ड-1 के आरक्षण से वहां के मौजूदा राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे। एससी आरक्षण के कारण सामान्य वर्ग के मौजूदा दावेदारों के लिए इस वार्ड से चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया है।
तीन एससी महिला, नौ सामान्य महिला वार्ड
आरक्षण ड्रा में सात एससी वार्डों में से तीन वार्ड एससी महिला के लिए आरक्षित होंगे। इसके अलावा नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। यानी कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं।
इसका सबसे बड़ा असर उन पुरुष नेताओं पर पड़ेगा, जो अपने वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अब कई नेताओं को दूसरे वार्ड की तलाश करनी होगी या अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारना होगा। चंडीगढ़ में पहले भी महिला आरक्षण के बाद पुरुष नेताओं की जगह उनकी पत्नियों को चुनाव मैदान में उतारने का उदाहरण सामने आ चुका है।
दलों में अब शुरू होगी टिकट की असली जंग
आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद राजनीतिक दलों के सामने प्रत्याशी चयन की चुनौती शुरू हो गई है। जिन पार्षदों के वार्ड आरक्षित हुए हैं, वे अब दूसरे वार्डों में अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश करेंगे। वहीं जिन वार्डों में महिला आरक्षण हुआ है, वहां पुरुष नेताओं के परिवारों से महिला चेहरों को आगे लाने की कवायद तेज होगी।
आरक्षण ड्रा ने कई मौजूदा पार्षदों के लिए वार्ड बदलने की मजबूरी पैदा कर दी है, जबकि नए चेहरों के लिए निगम चुनाव का रास्ता खोल दिया है।