धर्मशाला | राहुल चावला-:निर्वासित तिब्बती संसद परिसर के बाहर शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग सहित सरकार के मंत्री और सांसद मौजूद रहे। प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने महात्मा गांधी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद तिब्बती सरकार के मंत्रियों और सांसदों ने भी गांधी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए.कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने कहा कि महात्मा गांधी ने अहिंसा के माध्यम से बड़ी से बड़ी समस्याओं के समाधान का रास्ता दुनिया को दिखाया। उन्होंने कहा कि गांधी के अहिंसा और शांति के सिद्धांत से मार्टिन लूथर किंग जूनियर और नेल्सन मंडेला समेत दुनिया के कई नेताओं ने प्रेरणा ली।
पेंपा सेरिंग ने कहा कि परम पावन दलाई लामा भी तिब्बत-चीन समस्या के समाधान के लिए अहिंसा के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि हर वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर तिब्बती समुदाय महात्मा गांधी के मूल्यों और विचारों को याद करता है तथा उनसे प्रेरणा लेता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया के कई हिस्सों में हिंसा और युद्ध की स्थिति बनी हुई है। ऐसे दौर में महात्मा गांधी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। एक ही दुनिया में रहने वाले लोगों को आपसी शांति, संवाद और सौहार्द के साथ रहने का रास्ता तलाशना होगा।पेंपा सेरिंग ने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल किसी देश की आजादी नहीं, बल्कि विचारों की स्वतंत्रता भी है।लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों को दबाकर किसी समाज का दीर्घकालिक विकास संभव नहीं है।तिब्बत मुद्दे पर उन्होंने कहा कि तिब्बती नेतृत्व वर्तमान में ‘मिडिल वे अप्रोच’ यानी मध्यमार्ग की नीति पर आगे बढ़ रहा है।उनके अनुसार, दलाई लामा का मानना है कि यदि तिब्बत में शांति और वास्तविक स्वायत्तता सुनिश्चित होती है, तो तिब्बती पक्ष पूर्ण स्वतंत्रता की मांग के बजाय चीन के साथ रहने के विकल्प पर विचार कर सकता है।उन्होंने कहा कि तिब्बत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का समाधान भी शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से निकालने के प्रयास जारी हैं।