नई दिल्ली | शेयर बाजार में जुलाई के दौरान आई तेज़ गिरावट ने न केवल आम निवेशकों को प्रभावित किया, बल्कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को भी तगड़ा झटका दिया है। आंकड़ों के अनुसार, LIC को इस महीने अपने इक्विटी पोर्टफोलियो में करीब ₹46,000 करोड़ का नुकसान हुआ है—जो कि एक संस्थागत निवेशक के रूप में उसके फैसलों और जोखिम रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जुलाई में कैसे गिरा LIC का निवेश
- 30 जून 2025 को LIC के 322 शेयरों की कुल वैल्यू करीब ₹16.10 लाख करोड़ थी।
- 25 जुलाई 2025 तक यह घटकर ₹15.64 लाख करोड़ रह गई।
- यानी LIC के पोर्टफोलियो में ₹46,000 करोड़ की गिरावट आई।
हालांकि, अप्रैल 2025 की तुलना में LIC की संपत्ति अब भी ₹1.94 लाख करोड़ अधिक है, जो यह दर्शाता है कि साल की शुरुआत में बाजार ने बेहतर प्रदर्शन किया था।
कौन से शेयर बने घाटे की वजह?
Reliance Industries, LIC के सबसे बड़े निवेशों में से एक, इस गिरावट की प्रमुख वजह बना। इसके अलावा, TCS, Infosys, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे आईटी दिग्गजों ने मिलकर करीब ₹15,321 करोड़ का नुकसान पोर्टफोलियो पर डाला। इन कंपनियों में आई गिरावट LIC के घाटे का मुख्य कारण रही।
जोखिम कम करने के लिए उठा रणनीतिक कदम
जून तिमाही में LIC ने 81 कंपनियों से हिस्सेदारी घटाई, जबकि चार रक्षा क्षेत्र की कंपनियों में निवेश बढ़ाया। यह साफ संकेत है कि अब कंपनी अस्थिर सेक्टरों से हटकर रक्षा जैसे स्थिर और रणनीतिक क्षेत्रों की ओर रुख कर रही है, ताकि दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जानकार क्या कह रहे हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि LIC का पोर्टफोलियो भारत की आर्थिक दिशा और निवेशकों के भरोसे का प्रतिबिंब है। विदेशी निवेशकों की वापसी और बाजार में आई अस्थिरता का सीधा असर सार्वजनिक कंपनियों पर पड़ा है। हालांकि जैसे ही बाजार में स्थिरता लौटेगी, LIC की पुनर्संतुलन रणनीति लाभदायक साबित हो सकती है।
यह घटनाक्रम बताता है कि बड़े संस्थान भी बाजार के उतार-चढ़ाव से अछूते नहीं हैं, लेकिन सतर्क रणनीति से जोखिम को नियंत्रित किया जा सकता है। LIC की अगली चाल पर अब निवेशकों की नजर टिकी है।