Summer express,चंडीगढ़ |हरियाणा में आगामी नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कांग्रेस की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें राज्य में निकाय चुनावों पर रोक लगाने और वार्डबंदी प्रक्रिया को दोबारा कराने की मांग की गई थी।
कांग्रेस ने अपनी याचिका में अंबाला में एससी आरक्षित वार्डों की संख्या घटाए जाने और वार्डों के नए सिरे से सीमांकन को लेकर आपत्ति जताई थी। पार्टी की मांग थी कि मौजूदा अधिसूचना रद्द कर पूरी वार्डबंदी प्रक्रिया दोबारा की जाए और उसके बाद ही चुनाव कराए जाएं।
मामले की सुनवाई जस्टिस एच.एस. सेठी और जस्टिस यशवर्धन राठौड़ की खंडपीठ ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा हो चुकी है, ऐसे में इस चरण पर न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद उसे रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में नहीं होगा।
अदालत में पंचकूला के पूर्व चेयरमैन और अधिवक्ता रविंद्र रावल ने पक्ष रखते हुए वार्डबंदी और आरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए थे, लेकिन अदालत ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
इस फैसले के बाद अब सोनीपत, पंचकूला, अंबाला नगर निगमों के साथ रेवाड़ी नगर परिषद तथा उकलाना, धारूहेड़ा और सांपला नगर पालिकाओं में 10 मई को मतदान का रास्ता साफ हो गया है। इन सभी क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 अप्रैल से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, 10 मई को मतदान होगा और 13 मई को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसी दिन पंचायती राज संस्थाओं के 528 रिक्त पदों पर उपचुनाव भी संपन्न कराए जाएंगे।
चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है। इस बार मतदान ईवीएम से होगा, जबकि वीवीपैट का उपयोग नहीं किया जाएगा। मतदाताओं के लिए नोटा का विकल्प उपलब्ध रहेगा, हालांकि इसका परिणाम पर सीधा प्रभाव नहीं होगा।
प्रशासन ने चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की है। अदालत के फैसले के बाद अब सभी राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।