Delhi, 15 September
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य के अनुरूप शासन व्यवस्था के लिए लोक सेवाओं में बड़ा बदलाव करने का खाका तैयार किया है। इसका आधार है मिशन कर्मयोगी—लोक सेवा क्षमता निर्माण का राष्ट्रीय कार्यक्रम। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल भारत की प्रशासनिक संस्कृति में एक पीढ़ीगत निवेश है।
कर्मचारी से कर्मयोगी तक
मिशन का सबसे अहम संदेश है मानसिकता में बदलाव। अधिकारी अब सिर्फ़ कर्मचारी नहीं, बल्कि कर्मयोगी के रूप में देखे जाएंगे। कार्यक्रम तीन बड़े बदलावों पर केंद्रित है—
- मानसिकता में बदलाव: खुद को “कर्मचारी” से “कर्मयोगी” मानना।
- कार्यस्थल में बदलाव: केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रणालीगत बाधाओं को दूर करना।
- प्रबंधन प्रणाली में बदलाव: नियम-आधारित से भूमिका-आधारित मानव संसाधन तंत्र।
तकनीक और प्रशिक्षण का सहारा
इस मिशन की रीढ़ है आईजीओटी–कर्मयोगी प्लेटफ़ॉर्म। इसमें 3,000 से अधिक ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जो कभी भी और कहीं भी सीखने का अवसर देते हैं। अब तक लाखों अधिकारियों, डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को नई नीतियों, कानूनों और तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।
संस्कृति और सहयोग का संगम
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक ढांचे में सहयोगी और समग्र संस्कृति को बढ़ावा दिया है। महामारी के दौरान “टीम इंडिया” मॉडल इसका बड़ा उदाहरण रहा। अब यही भावना जीईएम और गतिशक्ति जैसे सुधारों में दिख रही है। मोदी निरंतर सीखने पर ज़ोर देते हैं और स्वयं भी अधिकारियों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करते हैं।
नागरिक-प्रथम दृष्टिकोण
मिशन कर्मयोगी नागरिक-केंद्रित शासन को मज़बूत करता है। नीतियों और योजनाओं में नागरिकों की भागीदारी पर बल दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री बार-बार कहते रहे हैं—“प्रत्येक निर्णय के केंद्र में नागरिक होना चाहिए।”
वैश्विक दक्षिण तक विस्तार
भारत ने न केवल अपने अनुभवों को अपनाया है, बल्कि उन्हें साझा करने की भी तैयारी की है। मॉरीशस जैसे देशों को पहले ही सहयोग की पेशकश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल विकासशील लोकतंत्रों में क्षमता निर्माण का वैश्विक मॉडल बन सकती है।
भविष्य की ओर कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत इसी राह पर आगे बढ़ा, तो नागरिकों को ऐसी सरकार का अनुभव होगा जो “सुनती है, सीखती है और काम करती है।” यही मिशन कर्मयोगी की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।